भारत-नेपाल सीमा से सटे चंदन चौकी में शनिवार को आयोजित भव्य कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने हजारों थारू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक सौंपते हुए बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश दिया, मुख्यमंत्री ने 4345 थारू परिवारों को भूमि अधिकार पत्र वितरित किए। वहीं पूर्वांचल से आए 2350 परिवारों को भी उनके अधिकार दिए गए, इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कागज नहीं, बल्कि “पहचान और आत्मनिर्भरता का प्रमाण” है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से उपेक्षित रहे इन परिवारों को अब उनका हक मिला है, जिससे उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आएगा, उन्होंने कहा कि अब ये परिवार आत्मनिर्भर बनेंगे, सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले इन लोगों को बसाया तो गया, लेकिन अधिकार देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, यह कार्य वर्तमान सरकार ने पूरा किया है।
कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ से उत्साहित मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर भी सख्त रुख दिखाया, बिना नाम लिए विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि “पहले एक जिला एक माफिया, एक जिला एक गुंडा पैदा किया जाता था, अब हमारी सरकार ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ के जरिए रोजगार और विकास को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने दो टूक कहा कि अब प्रदेश में किसी माफिया या गुंडे को पनपने नहीं दिया जाएगा, जो भी कानून तोड़ेगा, उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष पर भी जमकर प्रहार किया, साथ ही सपा सरकार के दौरान थारू समुदाय पर दर्ज करीब 4100 मुकदमों को वापस लेने का भी ऐलान किया, कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहम्मदी के लिए रवाना हो गए।
इस दौरान प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना और जिले के प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पहल को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे हजारों परिवारों को नया जीवन और सम्मान मिला है।


