असम में महिला वोटरों को लुभाने के लिए पार्टियों में रही होड़, बीजेपी या कांग्रेस… किसे मिलेगा फायदा?

 महिला वोटरों को लुभाने के लिए राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के खाते में कैश ट्रांसफर जैसी घोषणाएं करती हैं। असम भी इससे अछूता नहीं रहा।

असम में, बीजेपी के संकल्प पत्र में वादा किया है कि ‘अरुणोदय’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाला मासिक डॉयरेक्ट बैंक ट्रांसफर बढ़ाकर 3,000 रुपए कर दिया जाएगा और इसका लक्ष्य 40 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाना है। यह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की प्रमुख पहल है।

कांग्रेस ने असम के लिए अपने घोषणापत्र में, हर महिला के खाते में एक रकम का बिना किसी शर्त के बैंक ट्रांसफर करने और महिला उद्यमियों को 50,000 रुपए देने का वादा किया है।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि इन योजनाओं का लाभ किस पार्टी को मिलता है, ये तो चुनाव के नतीजों के बाद ही पता चलेगा।

महिला आरक्षण के लिए मोदी सरकार ने बढ़ाए कदम

राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो, नरेंद्र मोदी सरकार ने 2029 के आम चुनावों के से ही विधियकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान

असम और पुडुचेरी में कुल वोटर टर्नआउट अब तक के सबसे ऊंचे स्तर क्रमशः 85.9% और 89.9% पर पहुंच गया, वहीं इन दोनों राज्यों में पुरुष वोटरों का टर्नआउट भी अब तक का सबसे ऊंचा रहा। हालांकि, केरल में 75.2% पुरुष वोटर टर्नआउट, 1987 के विधानसभा चुनावों में राज्य में दर्ज किए गए अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 80.5% से काफी कम था। इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में महिला वोटरों की भारी भागीदारी कोई नई बात नहीं है।

पुडुचेरी में, 1964 से अब तक हुए कुल 30 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में से 18 में महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों के टर्नआउट से ज्यादा रहा है। केरल में, 1957 से अब तक राज्य में हुए 34 संसदीय/विधानसभा चुनावों में से नौ में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा रही है।

असम में महिलाओं का वोटर टर्नआउट ज्यादा

असम में महिलाओं का टर्नआउट पहली बार 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान पुरुषों के टर्नआउट से ज्यादा हुआ था। तब से, महिला वोटरों ने अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में बेहतर भागीदारी दिखाई है। सिवाय 2019 के लोकसभा चुनावों के, जब महिलाओं और पुरुषों का टर्नआउट बिल्कुल बराबर था। इसका मतलब यह है कि इस पूर्वोत्तर राज्य में हुए 33 लोकसभा/विधानसभा चुनावों में से चार में महिलाओं के वोट डालने का प्रतिशत ज्यादा रहा है।

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