‘जल्द ही कुछ अच्छा सुनने को मिलेगा…’, केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद बंधाई

1491 Shares

 केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर के लिए शीघ्र ही राज्य के दर्जे की बहाली की उम्मीद जताते हुए कहा कि मुझे लगता है कि आप इस पर बहुत जल्द कुछ अच्छा सुनेंगे। आज यहां शेरे कश्मीर इंटरनेशन कन्वेंशन सेंटर एसकेआइसीसी में टेली-ला पहलग के तहत आयोजित क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला के उद्घाटन के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अदालतों में लगातार बढ़ते लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों पर बोझ कम करना और विवाद सुलझाने में तेज़ी लाने के लिए कानूनी मदद और टेक्नोलाजी से चलने वाले प्री-लिटिगेशन टूल्स को सरकार द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला 2026 का आयोजन न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने (डीआईएसएचए- दिशा) की टेली-लॉ पहल के अंतर्गत किया जा रहा है। केंद्रीय क्षेत्र की इस योजना को भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय का न्याय विभाग कार्यान्वित कर रहा है। इस कार्यशाला का आयोजन न्याय विभाग प्रौद्योगिकी-सक्षम कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और प्रमुख हितधारकों के बीच जानकारीपूर्ण विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।

‘जल्द ही कुछ अच्छा सुनने को मिलेगा’

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाली का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है।केंद्रीय गहमंत्री लोकसभा में कह चुके हैं कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाएगा। यह जम्मू कश्मीर के लोगों का अधिकार है। बस आप इंतजार करिए, मुझे उम्मीद है कि जल्द ही आपको कुछ अच्छा सुनने को मिलेगा।

उन्होंने कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि नागरिक कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) से संपर्क कर सकते हैं, जहां स्थानीय वकीलों का एक पैनल कानूनी सलाह और प्री-लिटिगेशन मदद देता है। उन्होंने कहा, “केस कोर्ट तक पहुँचने से पहले, मामलों को मध्यस्थता, आर्बिट्रेशन या सुलह के ज़रिए सुलझाया जा सकता है। प्री-लिटिगेशन कानूनी मदद का यही मकसद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *