केंद्र की ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति को लेकर आरडब्ल्यूए ने चिंता जताई है। उनके अनुसार, मेट्रो, रेलवे लाइन और आरआरटीएस कॉरिडोर के नजदीक सुनियोजित विकास की प्रक्रिया से भीड़भाड़ और जाम की समस्या बढ़ेगी।
नई नीति के तहत मेट्रो और आरआरटीएस स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में सघन और मिश्रित उपयोग वाले विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
उससे लगभग 207 वर्ग किमी का क्षेत्र कवर होगा, जहां लोग अपने कार्यस्थल और सार्वजनिक परिवहन के करीब रह सकेंगे। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियाें के मुताबिक पहले ही मेट्रो स्टेशनों के आस-पास जाम व भीड़भाड़ की समस्या अधिक है। ऊपर से नई नीति के तहत अब व्यावसायिक तथा आवास मिश्रित उपयाेग के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
नई नीति के तहत इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
नई नीति के तहत ग्रेटर कैलाश जैसे कई इलाकों का 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र इसके दायरे में आ जाएगा। इसी तरह, मॉडल टाउन जैसी कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे न सिर्फ जाम और भीड़भाड़ बढ़ेगा बल्कि वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होगी।आरडब्ल्यूए के फेडरेशन यूनाइटेड रेजिडेंट ऑफ दिल्ली (यूआरडी) के महासचिव सौरभ गांधी के अनुसार, यह नीति चिंतित करने वाली है। वह भी तब जबकि, मास्टर प्लान 2021 को अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। जिससे दिल्ली की आबोहवा को बेहतर बनाया जाना था।
उन्होंने कहा कि मॉडल टाउन को ही लें। अगर मिश्रित भू उपयोग को बढ़ावा मिलता है तो उसके 500 मीटर के दायरे में न सिर्फ इमारतों का घनत्व बढ़ेगा, बल्कि जनसंख्या दबाव भी काफी अधिक हो जाएगा।


