पुरुष गर्भनिरोधक में ‘महा-क्रांति’, पुरुषों के लिए सुरक्षित और अस्थायी गर्भनिरोधक विधि खोजी गई

 दशकों से परिवार नियोजन का सारा बोझ महिलाओं के कंधों पर रहा है। गर्भनिरोधक गोलियों से लेकर अन्य दर्दनाक प्रक्रियाओं तक, जिम्मेदारी का यह पलड़ा हमेशा एक तरफ झुका रहा।

विज्ञान एक ऐसे ‘मृगतृष्णा’ के पीछे था जो पुरुषों के लिए एक सुरक्षित, प्रभावी और अस्थायी गर्भनिरोधक प्रदान कर सके। अब विज्ञान के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है, जो भविष्य की तस्वीर बदल सकती है।

कार्नेल यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उस ‘होली ग्रेल’ यानी अमृत को खोज निकालने का दावा किया है, जो पुरुष गर्भनिरोधक की परिभाषा बदल सकता है।

उन्होंने एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है, जिससे पुरुषों के लिए ‘रिवर्सिबल’ (प्रतिवर्ती) गर्भनिरोधक गोली का सपना अब हकीकत के करीब है। यह खोज न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि उन करोड़ों जोड़ों के लिए एक नई उम्मीद है जो परिवार नियोजन की जिम्मेदारी को समान रूप से साझा करना चाहते हैं।

शोध की सफलता

शुक्राणुओं के निर्माण पर अस्थायी ‘ब्रेक’ मीडिया रिपो‌र्ट्स के अनुसार, इस क्रांतिकारी शोध में विज्ञानियों ने जेक्यू1 नामक एक छोटे अणु का उपयोग किया। चूहों पर किए गए छह साल के लंबे परीक्षण के बाद यह पाया गया कि यह यौगिक ‘मयोसिस’ की प्रक्रिया को बाधित कर देता है।

मयोसिस वह कोशिका विभाजन है जिसके माध्यम से शरीर में शुक्राणुओं का निर्माण होता है। विज्ञानियों ने पाया कि जब चूहों को तीन सप्ताह तक जेक्यू1 दिया गया, तो उनके शरीर में शुक्राणुओं का उत्पादन पूरी तरह रुक गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह प्रक्रिया पूरी तरह गैर-हार्मोनल है। वर्तमान में महिलाओं के लिए उपलब्ध गर्भनिरोधक अक्सर हार्मोनल संतुलन बिगाड़ देते हैं, लेकिन यह नई तकनीक शरीर के प्राकृतिक हार्मोन से छेड़छाड़ किए बिना सीधे ‘लक्ष्य पर वार’ करती है।

सुरक्षा और रिकवरी

भविष्य की पीढि़यों पर कोई आंच नहीं अक्सर पुरुष गर्भनिरोधक के साथ सबसे बड़ा डर ‘स्थायी नपुंसकता’ का होता है। लेकिन इस शोध ने उन सभी ¨चताओं को खारिज कर दिया है।

कार्नेल रिप्रोडक्टिव साइंसेज सेंटर की निदेशक प्रोफेसर पाउला कोहेन ने बताया, ”’हमारा अध्ययन दिखाता है कि उपचार रुकने के बाद शुक्राणु बनाने की क्षमता पूरी तरह वापस लौट आती है।”’

जैसे ही चूहों का उपचार बंद किया गया, लगभग छह सप्ताह के भीतर उनकी प्रजनन क्षमता बहाल हो गई। इससे भी सुखद परिणाम यह रहा कि इन चूहों से पैदा हुई संतानें पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य थीं। शोधकर्ताओं ने सावधानी बरतते हुए ‘स्पर्मेटोगोनियल स्टेम सेल्स’ को नुकसान नहीं पहुंचाया, ताकि भविष्य में पिता बनने की संभावना हमेशा बनी रहे।

सुई या पैच: कैसा होगा इस्तेमाल?

वर्तमान में पुरुषों के पास केवल कंडोम या नसबंदी जैसे सीमित विकल्प हैं। नसबंदी एक जटिल और अक्सर स्थायी प्रक्रिया मानी जाती है, जिससे कई पुरुष कतराते हैं। भविष्य में यह नया गर्भनिरोधक हर तीन महीने में लगने वाले एक इंजेक्शन या एक साधारण पैच के रूप में उपलब्ध हो सकता है।

हालांकि जेक्यू1 का उपयोग इसके कुछ तंत्रिका संबंधी दुष्प्रभावों के कारण सीधे मनुष्यों पर नहीं किया जाएगा, लेकिन इसने उस सटीक रास्ते को खोल दिया है जिस पर चलकर विज्ञानी एक सुरक्षित मानवीय दवा तैयार कर सकते हैं। यह खोज समाज में लैंगिक समानता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है, जहां अब गर्भनिरोधक का सारा बोझ केवल महिलाओं के कंधों पर नहीं रहेगा।

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