नासिक स्थित एक आइटी कंपनी में चल रहे यौन शोषण और मतांतरण की कोशिश के मामले में कंपनी के छह टीम लीडर्स, एक एचआर अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले को ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ भी कहा जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है।
नासिक की एक आइटी कंपनी में कार्यरत महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी के सीनियर कर्मचारी (टीम लीडर्स) पिछले चार साल से उन पर यौन शोषण एवं मतांतरण का दबाव डाल रहे थे।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वहां आठ महिलाओं और एक पुरुष कर्मचारी को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित और मजबूर किया गया। सभी ने आरोप लगाया है कि उन्हें गोमांस खाने और आफिस में नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। उनके अपने धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया।
यह मामला तब सामने आया, जब कुछ महिला कर्मचारियों के पहनावे में बदलाव देखा गया और उन्होंने रमजान के दौरान रोजा रखना शुरू कर दिया।
तब स्वजन की शिकायत के बाद नासिक पुलिस ने इस मामले में सभी पीडि़ताओं की ओर से कुल नौ एफआइआर दर्ज कर अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार लोगों में छह टीम लीडर्स हैं, जिनके नाम हैं, आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाह रुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार एवं दानिश शेख।
कंपनी की एचआर प्रबंधक अश्विनी छनानी को भी गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि कर्मचारियों द्वारा शिकायत करने पर उसने आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाय पीडि़त महिलाओं को मुंह बंद रखने के लिए धमकाया।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए पुलिस उपायुक्त संदीप मिटके के नेतृत्व में एक एसआइटी का गठन किया गया है।
एसआइटी में अनुभवी पुलिस अधिकारियों के साथ साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, ताकि डिजिटल सुबूतों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच की जा सके।
एसआइटी इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर किया गया अपराध है या कंपनी में कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने इसे कॉर्पोरेट जिहाद बताते हुए इसमें अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और मानव तस्करी का भी संदेह जताया है। गिरफ्तार हुए सभी सात लोगों को स्थानीय अदालत ने 10 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।


