उत्तराखंड लोकायुक्त नियुक्ति: टली बैठक, हाई कोर्ट में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई

1349 Shares

 हाई कोर्ट ने प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि तीन अप्रैल को सर्च कमेटी की बैठक कोरम के अभाव में नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तिथि नियत कर दी।

पिछली तिथि को कोर्ट ने सरकार से तीन अप्रैल को प्रस्तावित सर्च कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय को शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे।

बुधवार को गौलापार(हल्द्वानी) निवासी रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। पूर्व में राज्य सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए छह माह का समय मांगा गया था लेकिन कोर्ट ने तीन माह का समय दिया था। जोशी ने लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर 2021 में जनहित याचिका दायर की थी।

याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही की। जबकि संस्था के नाम पर वार्षिक दो से तीन करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त के माध्यम से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है जबकि राज्य में हर एक छोटे से छोटा मामला भी हाई कोर्ट के समक्ष लाना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है, जिसके पास यह अधिकार हो कि वह बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार का केस दर्ज कर सके।

सतर्कता विभाग (विजिलेंस) भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है। जिस पर पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *