Samastipur Education Crisis: जिले में इंटर स्तर पर कॉमर्स संकाय की पढ़ाई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिले के अधिकांश इंटर विद्यालयों में कॉमर्स की सुविधा नहीं होने से दसवीं पास छात्रों को दाखिला लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
244 स्कूलों में नहीं कॉमर्स की पढ़ाई
जिले में बिहार बोर्ड से पंजीकृत कुल 432 इंटर स्तरीय विद्यालय हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 188 स्कूलों में ही कॉमर्स की पढ़ाई होती है। यानी 244 विद्यालय ऐसे हैं जहां यह संकाय उपलब्ध ही नहीं है।
कॉमर्स में कुल 11,732 सीटें निर्धारित की गई हैं, जो छात्रों की बढ़ती मांग के मुकाबले कम साबित हो रही हैं।
बढ़ रही रुचि, लेकिन विकल्प सीमित
पिछले एक दशक में छात्रों के बीच कॉमर्स संकाय के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है। इसके बावजूद पंचायत स्तर के अधिकतर विद्यालयों में यह सुविधा नहीं होने से इच्छुक छात्र-छात्राएं नामांकन से वंचित रह जाते हैं।
कला और विज्ञान में बेहतर स्थिति
कॉमर्स के मुकाबले जिले में कला और विज्ञान संकाय की स्थिति काफी बेहतर है। इंटर स्तर पर कला में 36,439 और विज्ञान में 36,135 सीटें उपलब्ध हैं। यही कारण है कि अधिकांश छात्र इन दोनों संकायों में ही दाखिला लेते हैं।
जिले में कुल 84,306 सीटों पर नामांकन की व्यवस्था है, जिसमें सबसे अधिक दाखिला कला संकाय में होता है, जबकि विज्ञान दूसरे स्थान पर है।
शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या
जिन विद्यालयों में कॉमर्स की पढ़ाई हो रही है, वहां भी पूरी तरह से स्थिति संतोषजनक नहीं है। सरकार द्वारा बीपीएससी के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन कई स्कूलों में अब भी कॉमर्स शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
विभाग का दावा और जरूरत
जिला शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता का कहना है कि विभागीय निर्देश के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की गई है और छात्रों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर कॉमर्स संकाय के विस्तार और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने और बेहतर शिक्षा पाने का अवसर मिल सके।


