बदलते मौसम के चलते इस बार प्रवासी पक्षी चकमा खा गए हैं। कभी गर्मी तो कभी ठंडक के इस मिश्रण को ये मेहमान पक्षी ठीक से समझ नहीं पाए। इस कारण सीमांत क्षेत्र स्थित घराना वेटलैंड से ये परिंदे समय से पहले ही अपने ब्रीडिंग ग्राउंड की ओर उड़ गए हैं। इनकी रवानगी फरवरी में ही शुरू हो गई थी, जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस को छूने लगा और 50 प्रतिशत से अधिक पक्षी घराना छोड़ चुके थे।
हालांकि, बाद में मौसम में बदलाव आया और ठंडक बढ़ गई। ऐसे में वापसी की तैयारी में बैठे प्रवासी पक्षियों को यहां ठहरने का वातावरण मिल गया। लेकिन फिर से गर्मी ने तेजी पकड़ ली, जिससे बचे खुचे प्रवासी पक्षियों के जाने का क्रम तेज हो गया।
मौसम में गर्मी और नर्मी का खेल चलता रहा और मध्य मार्च में ही घराना वेटलैंड खाली-खाली सा हो गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि मौसम तो सुहावना है, लेकिन घराना वेटलैंड पर प्रवासी पक्षी नहीं हैं। प्रवासी पक्षी जा चुके हैं और वेटलैंड अब खाली हो गया है। महज नार्दन शावरल, गारगेनी, कामन टील प्रजाति के कुछ पक्षी ही यहां टिके हुए हैं, जो अगले दो-चार दिन में चले जाएंगे।
प्रवासी पक्षियों पर अध्ययन कर रही पीजी छात्रा रितिका का कहना है कि आम तौर पर प्रवासी पक्षी अप्रैल के अंत तक बने रहते हैं, लेकिन इस बार 15-20 दिन पहले ही प्रवासी पक्षी अपने ब्रीडिंग ग्राउंड की ओर चले गए। मौसम के मिजाज को अबकी कोई समझ नहीं पा रहा है। इसका असर खेती पर भी पड़ा है। आम की फसल पर समय से पहले बौर आ गया है। फरवरी माह जब प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतर वातावरण वाला होता है, इस बार गर्मी रही। ये प्रवासी पक्षी ठंडे इलाकों के हैं और गर्मी सहन नहीं कर सकते। इसलिए इस बार मौसम से चकमा खा गए।
इस बार प्रवासी पक्षियों की संख्या रही अच्छी: वंशिका
प्रवासी पक्षियों पर नजर रख रही वंशिका का कहना है कि फिर भी घराना वेटलैंड में इस बार प्रवासी पक्षियों की अच्छी संख्या रही। सरपट्टी सवन की संख्या ही दस हजार के करीब रही, जबकि पहले ये छह से सात हजार की संख्या में आते थे। बहरहाल, अब घराना वेटलैंड से प्रवासी पक्षी जा चुके हैं। अगले छह माह बाद, जब सर्दियों का मौसम शुरू होगा, तब घराना वेटलैंड पर प्रवासी पक्षियों का आगमन हो पाएगा। अक्टूबर माह में प्रवासी पक्षियों के आने का क्रम शुरू हो जाता है।


