मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर रहे हैं। प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच यह बजट खास रहेगा। सीएम के विपक्ष पर टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष के लगातार हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवावही 11:30 बजे तक स्थगित कर दी।
सीएम सुक्खू ने कहा कि विकट परिस्थिति में विपक्ष ने सरकार का साथ नहीं दिया, इस पर हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष ने खड़े होकर आपत्ति जताई। सभी वेल में आकर नारेबाजी करना शुरू कर दिया है। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है।
बजट भाषण के शब्दों पर आपत्ति
भाजपा विधायकों ने सदन में नारेबाजी करना शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह किया और उन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने इन शब्दों को बजट भाषण में लिखा।
दुनिया युद्ध के मुंह पर खड़ी
सीएम ने कहा कि विश्व में हालात ठीक नहीं हैं। इस कारण पेट्रोल डीजल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। आज दुनिया तीसरे महायुद्ध के मुंह पर खड़ी है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। महंगाई बढ़ रही है। गरीब लोगों को घर चलाना मुश्किल होगा
11:04 बजे बजट पढ़ना किया शुरू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 11:04 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट भाषण पढ़ना शुरू किया। सीएम सुक्खू ने कहा कि ऐसे समय में बजट पेश किया जा रहा, जब आरजीडी को बंद किया गया। मैं पूरी टीम को बधाई देता हूं। मेरी रात को नींद टूट जाती थी कि कैसे जनकल्याण किया जाएगा। 8 से 10 दिन सभी ने बजट बनाने की मदद की।
आरडीजी बंद होने के बाद पहला बजट
यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब पहली अप्रैल से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए वित्तीय संसाधन जुटाने की होगी। आय बढ़ाने के नए विकल्प और खर्चों के संतुलन पर विशेष ध्यान रहेगा।
बजट से उम्मीदें, सरकार का 7 क्षेत्रों पर जोर
बजट से विधायक, कर्मचारी, पेंशनर, श्रमिक और आम जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डाटा स्टोरेज शामिल हैं। बजट में इन क्षेत्रों के लिए ठोस घोषणाएं हो सकती हैं।
एक लाख करोड़ से अधिक का लोन
प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है। हर माह वेतन, पेंशन और अन्य देनदारियों के लिए करीब 2800 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि सरकार को विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना होगा।
गत वित्त वर्ष का बजट
पिछले वर्ष 58,514 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था। मौजूदा परिस्थितियों को देख इस बार भी बजट का आकार इसी के आसपास रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार देर रात तक अधिकारियों के साथ बजट मसौदे पर मंथन किया और भाषण को अंतिम रूप दिया।


