नौकरी से इस्तीफा देने वाले आइएएस रिंकू सिंह राही पर 17 साल पहले जनपद में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान जानलेवा हमला था। तब इन्होंने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का राजफाश किया था।
यह बात वर्ष 2009 की है। तब रिंकू सिंह राही आर्य समाज रोड पर आफिसर्स कालोनी में सरकारी आवास में रहते थे। जैसे ही उन्होंने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में घोटाले को उजागर किया तो वह उन लोगों के निशाने पर आ गए थे, जो इस घोटाले में शामिल थे।
बदमाशों ने किया था हमला
ऑफिसर्स कॉलोनी में ही 26 मार्च 2009 को रिंकू सिंह राही पर बैडमिंटन कोर्ट में बदमाशों ने हमला किया था और कई गोलियां मारकर फरार हो गए थे। इस हमले में रिंकू सिंह का जबड़ा और आंख क्षतिग्रस्त हुए थे।
हमले में उन्हें सात गोलियां लगी थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह बच गए और बाद में उन्होंने लड़ाई जारी रखी। उस मुकदमे की सुनवाई को लेकर वह कई बार जनपद में आए। फरवरी 2021 को विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने इस मुकदमे में निर्णय सुनाया था।
कोर्ट ने मुकदमे में आरोपित गो सेवा आयोग उप्र. के पूर्व अध्यक्ष मुकेश चौधरी, ब्रजमोहन, परमीत तथा आदेश ठाकुर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वहीं लेखाकार अशोक कश्यप, प्रहलाद, अमित छोकर तथा बाबी उर्फ पंकज को 40-40 हजार रुपये अर्थदंड और 10-10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।


