देशभर के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स को मरीज को देखने और दवा लिखने के बाद उसे ऑनलाइन डेटा सेवा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उनके समय की बचत के साथ ही परेशानी खत्म हो जाएगी।
वहीं मरीजों को अपने दवा और जांचों के पर्चे के खोने या खराब होने की भी चिंता नहीं रहेगी। सरकारी अस्पताल में एक क्लिक में उनकी संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री सामने आ जाएगी।
इस समस्या का समाधान आईक्यू-लाइन कंपनी ने ढूंढा है। इसे कंपनी ने स्मार्ट पर्चा नाम दिया है। इस स्मार्ट पैड पर पर्चा रखकर दवा लिखते ही फार्मासिस्ट और लैब में डिटेल पहुंच जाएगी और ऑनलाइन डाटा में सेव हो जाएगी। इसे राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के इंक्यूबेशन सेंटर में परफॉर्मेंस बेहतर करने के लिए इंक्यूबेट किया गया है।
ऑनलाइन डाटा चढ़ाने में होती है सबसे ज्यादा परेशानी
बता दें कि देशभर के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में एक-एक डॉक्टर पर सैकड़ों मरीज देखने का दबाव रहता है। इस दौरान उनके लिए मरीजों का ऑनलाइन डाटा चढ़ाना सबसे बड़ी परेशानी होती है।
कई बार ऐसे में कई मरीजों का डाटा सेव करने में कई बिंदु छूट जाते हैं और बड़े पर्चे होने के चलते आधी-अधूरी जानकारी सेव कर छोड़ दिया जाता है। इससे डॉक्टर के साथ ही दोबारा आने वाले मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नोएडा के सेक्टर 142 स्थित आइक्यू-लाइन कंपनी के संस्थापक आयुष गर्ग ने बताया कि स्मार्ट पर्चे को पूरी तरह से एआई युक्त किया गया है।
इसे कंप्यूटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा और इसके लिए एक पैड तैयार किया गया है, जिसमें डॉक्टर पर्चा रखकर दवा लिखेंगे और बिना कंप्यूटर पर लिखे और बिना देखे ही ऑनलाइन डेटा सेव हो जाएगा। दवा का पर्चा फार्मासिस्ट और लैब के सिस्टम पर पहुंच जाएगा।
इससे मरीज का डेटा कंप्यूटर बिना सेव किए ही आटोमेटिक ही ऑनलाइन के साथ ही फार्मासिस्ट और लैब के पास पहुंच जाएगा।
इस तरह से समय की होगी बचत
आयुष गर्ग ने बताया कि फार्मासिस्ट में दवाओं को समझने और लैब में पंजीकरण में एक से डेढ़ मिनट का समय लगता है, लेकिन स्मार्ट पर्चे के उपयोग से यह समय पांच से छह सेकंड का लगेगा। इससे मरीजों के समय की बचत के साथ ही अस्पतालों में लगने वाली लंबी कतार से बच सकेगा।
अप्रैल में दो सीएचसी केंद्र पर होगा पायलट उपयोग
कंपनी के संस्थापक आयुष गर्ग का दावा है कि इस तरह का एआई युक्त साफ्टवेयर दुनिया का पहला है। इसे पूरी तरह से मेड इन इंडिया की तर्ज पर तैयार किया गया है और पेटेंट के लिए फाइल किया गया है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वेलिडेशन कर लिया है। सरकार की ओर से प्रदेश के दो सामुदायिक केंद्र पर पायलट के तौर पर काम करने के लिए अप्रैल से उपयोग में लाने की अनुमति दी गई है। बेहतर प्रदर्शन के आधार पर देश के अन्य सरकारी अस्पतालों में उपयोग के लिए लाया जाएगा।


