चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने बीएड की प्रयोगात्मक परीक्षाओं को एक बार फिर स्थगित कर दिया। पहले 28-29 मार्च को निर्धारित परीक्षाएं 24-25 अप्रैल को की गई और अब एक अप्रैल को निर्धारित प्रयोगात्मक परीक्षाओं को भी विश्वविद्यालय ने दो दिन पहले स्थगित कर दिया।
एक अप्रैल को परीक्षा देने वाले बहुत से अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से सोमवार को मेरठ पहुंच चुके हैं। परीक्षा के लिए आने-जाने का खर्च व टिकट अतिरिक्त खर्च हुआ। इनमें से बहुत से अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जो स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
इसके अलावा सोमवार को छात्रों ने विभिन्न मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे।
परीक्षा फार्म भरने में आ रही दुश्वारियों और हास्टल के मेस में मिल रहे खराब खाने सहित बड़ौत के लखमीचंद पटवारी कालेज के बीएड छात्रों की डिग्री न मिलने के विरोध में हंगामा किया। अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले इन दर्जनों छात्र-छात्राओं का भविष्य इस कदर अधर में है कि बिहार में शिक्षक पद पर चयन होने के बावजूद वे ज्वाइनिंग नहीं कर पा रहे हैं। विश्वविद्यालय से मूल अंकतालिका और डिग्री न मिलने के कारण इन मेधावियों की सरकारी नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बीटेक एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग का नाम बदलकर बीटेक डिजिटल इंजीनियरिंग करने का विरोध किया।


