तंबाकू आधारित प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी Elitecon International Ltd पर सेबी ने शिकंजा कसा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कंपनी के खिलाफ नियामक कार्रवाई शुरू कर दी है। SEBI को शुरुआती जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी के शेयरों में ‘पंप-एंड-डंप’ योजना के जरिए हेरफेर किया गया था।
इस आधार पर एक्शन लेते हुए सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में एलीटकोन इंटरनेशनल के प्रमोटर समेत कुछ लोगों अगले आदेश तक शेयरों की ट्रेडिंग या किसी भी तरह का लेन-देने करने पर रोक लगा दी है। यह कंपनी तंबाकू-आधारित उत्पादों, जिनमें सिगरेट, शीशा और स्मोकिंग मिक्सचर शामिल हैं का निर्माण और व्यापार करती है।
एलीटकोन इंटरनेशनल के उत्पाद खाड़ी देशों में खूब बिकते हैं। यह कंपनी UAE, सिंगापुर, हांगकांग तथा यूरोप जैसे क्षेत्रों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। युद्ध की वजह से इसका निर्यात भी प्रभावित हुआ है और अब शेयरों की हेराफेरी करने के आरोप में प्रमोटर पर भी शिकंजा कसा है।
अचानक से बढ़ीं कीमतें, फिर हुईं धड़ाम
मार्केट रेगुलेटर ने पाया है कि Elitecon के शेयर की कीमत कम समय में ही 60 गुना से ज्यादा बढ़ गई और फिर अचानक तेजी से गिर गई। SEBI ने कहा कि यह पैटर्न हेर-फेर वाली ट्रेडिंग गतिविधियों से मेल खाता है। आरोप है कि इस तेजी के साथ-साथ प्रमोटरों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बीच तालमेल वाली ट्रेडिंग और फंड ट्रांसफर भी हुए।
SEBI ने यह भी पाया कि कंपनी के बताए गए फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में भी बहुत ज्यादा और बिना किसी वजह के बढ़ोतरी देखने को मिली। पता चला कि Elitecon का रेवेन्यू दो साल की अवधि में लगभग 686 गुना बढ़ गया। सबसे बड़ी बढ़ोतरी सितंबर 2025 की तिमाही में हुई, जब रेवेन्यू पिछली तिमाही (जून 2025) के 525 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर तिमाही में 2,195.8 करोड़ रुपये हो गया।
प्रमोटर विपिन शर्मा को ट्रेडिंग के सबसे व्यस्त समय के दौरान एक मुख्य विक्रेता के रूप में पहचाना गया है, जब शेयरों की खरीद-बिक्री की मात्रा और कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं। SEBI ने कंपनी पर जानकारी देने में गंभीर चूक का भी आरोप लगाया है।
जब्त कर लिए जाएंगे पैसे
सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों को नोटिस मिला है उनके बैंक खाते में जमा 51.26 करोड़ रुपये (51,26,31,101.30 रुपये) के गैर-कानूनी मुनाफे की सीमा तक जब्त कर लिए जाएंगे।
SEBI ने कहा, “सभी नोटिस पाने वालों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट खोलें, ताकि ऊपर बताई गई जब्त की गई रकम को टेबल के अनुसार जमा किया जा सके, जिस पर SEBI के पक्ष में ‘lien’ (दावा) मार्क किया गया हो; और इस अकाउंट में रखी रकम को SEBI की अनुमति के बिना रिलीज नहीं किया जाएगा।”
मार्केट रेगुलेटर ने आरोप लगाया कि नोटिस पाने वालों ने धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में हिस्सा लिया। Elitecon पर आरोप है कि उसने शेयरधारकों को 408 करोड़ रुपये के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़ी कार्रवाई के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी, जबकि अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी या तो देर से दी गई या बिल्कुल भी नहीं दी गई, जिससे निवेशकों को अहम जानकारी से वंचित रहना पड़ा।


