आज के समय में प्लास्टिक हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। चाहे पानी पीने की बोतल हो, खाने के डिब्बे हों या फिर किसी सामान की पैकिंग- हर जगह प्लास्टिक का ही इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही प्लास्टिक धीरे-धीरे टूटकर बेहद छोटे कणों में बदल जाता है?
इन अदृश्य कणों को ‘नैनो प्लास्टिक’ कहा जाता है। ये इतने बारीक होते हैं कि सांस लेने, पानी पीने या भोजन के जरिए बहुत ही आसानी से हमारे शरीर के अंदर दाखिल हो जाते हैं।
सुरक्षा चक्र तोड़कर दिमाग तक पहुंचने का खतरा
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि ये नैनो प्लास्टिक केवल हमारे शरीर तक ही सीमित नहीं रहते। ये हमारे खून में घुल जाते हैं और वहां से सफर करते हुए सीधे हमारे दिमाग तक पहुंच सकते हैं (Nanoplastic Exposure and Brain Health)।
हमारे शरीर में दिमाग को सुरक्षित रखने के लिए एक खास परत होती है, जो बाहरी और नुकसानदायक चीजों को अंदर जाने से रोकती है, लेकिन नैनो प्लास्टिक के कण इतने ज्यादा सूक्ष्म होते हैं कि वे इस सुरक्षा परत को भी आसानी से पार कर लेते हैं और दिमाग के अंदर प्रवेश कर जाते हैं।


