मेरठ में हुए 13.80 करोड़ के स्टांप घोटाले में बड़ी कार्रवाई, 23 सब रजिस्ट्रारों पर गिरी गाज

प्रयोग किए जा चुके पुराने भौतिक पेपरों को साफ करके उन्हें फिर से बैनामों में उपयोग करके मेरठ जनपद में वर्ष 2015 से वर्ष 2023 तक सरकारी खजाने को 13.80 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि की क्षति पहुंचाई गई। इस स्टांप घोटाले में अभी तक जांच का सिलसिला जारी था तथा बैनामों में खरीदार पक्ष से घोटाले की उक्त स्टांप राशि को वसूला जा रहा था।

घोटाले का मुख्य आरोपित अधिवक्ता जेल में है। अब मामले में शासन ने पहली बार 23 उप निबंधक और प्रभारी उप निबंधकों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की है। घोटाले की अवधि में तैनात रहने वाले कुल 32 अधिकारियों के नाम सामने आये थे। जिनमें से दो की मृत्यु हो चुकी है तथा छह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

इस घोटाले को सामने वाले वाले उप निबंधक को छोड़ा गया है। 2023 में खुला था स्टांप घोटाले का खेल : जनपद में वर्ष 2023 में स्टांप घोटाला सामने आया था। प्रारंभिक जांच में 2020 से 2023 के बीच 999 बैनामों में साढ़े सात करोड़ रुपये से अधिक की राशि का घोटाला पाया गया। विधानसभा की प्राक्कलन समिति के आदेश पर 2015 से 2020 के बीच हुए बैनामों की भी जांच की गई, जिसमें 932 बैनामों में 6.39 करोड़ रुपये के संदिग्ध स्टांप पेपर मिले। इस प्रकार आठ साल में कुल 1831 बैनामों में 13.80 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया।

आइजी नेहा शर्मा ने सदर द्वितीय उप निबंधक कार्यालय में वर्तमान में तैनात उप निबंधक बोबिल कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है, क्योंकि उनके द्वारा ही स्टांप घोटाला पकड़कर अधिकारियों के सामने लाया था।

जेल में है आरोपित अधिवक्ता

घोटाला सामने आने के बाद इन बैनामों को प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ता विशाल वर्मा के खिलाफ आम जनता और विभाग की ओर से एफआइआर दर्ज कराई गई। शासन ने मामले की जांच एसआइटी को सौंपी है। आरोपित वर्तमान में जेल में है। विधानसभा की प्राक्कलन समिति लगातार इस मामले की जांच की समीक्षा कर रही है।

तीन साल बाद अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई

स्टांप घोटाले में आरोप लगाये जा रहे थे कि इस अवधि में तैनात रहे निबंधन अधिकारियों पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। प्राक्कलन समिति के निर्देश पर आइजी निबंधन ने इस अवधि में स्टांप घोटाले वाले कार्यालयों में तैनात रहे उप निबंधक और प्रभारी उप निबंधकों के नाम मांगे थे। सूची में पांच कार्यालयों के कुल 32 नाम आइजी को भेजे गए थे, जिनमें 14 उप निबंधक और 18 प्रभारी उप निबंधक (वरिष्ठ लिपिक) शामिल थे।

इनमें से आठ उप निबंधक प्रमोशन पाकर वर्तमान में एआइजी के पद पर तैनात हैं, जबकि दो प्रभारी उप निबंधकों की सेवानिवृत्ति के बाद मृत्यु हो चुकी है। छह अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आइजी निबंधन नेहा शर्मा ने इनमें से 23 के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टी की कार्रवाई की है। जनपद में कुल छह उप निबंधक कार्यालय हैं। मवाना कार्यालय में कोई फर्जी स्टांप नहीं मिला, जबकि सरधना कार्यालय में एक मामला मिला था। शहर के चारों उप निबंधक कार्यालयों में ये मामले सामने आए।

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