दहिसर ईस्ट निवासी कैप्टन वीरेंद्र विश्वकर्मा और उनके चालक दल को मंगलवार को भारतीय नौसेना द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के एक प्रमुख बंदरगाह से युद्ध क्षेत्र के बीच सुरक्षित निकाल लिया गया है।
युद्ध शुरू होने के बाद से कैप्टन और उनकी टीम 2 मार्च से भारी मात्रा में लिक्विफाइड एलपीजी के साथ वहां फंसी हुई थी। 28 मार्च को कैप्टन का जहाज गुजरात के कच्छ जिले के कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा।
कैप्टन वीरेंद्र विश्वकर्मा और उनकी टीम, जिसमें थर्ड ऑफिसर और 33 क्रू सदस्य शामिल थे, उन्होंने 28 फरवरी को अपनी यात्रा शुरू की थी। युद्ध की स्थिति के कारण वे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फंस गए थे।
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच शत्रुता के कारण सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। कैप्टन का जहाज लिक्विफाइड एलपीजी ले जा रहा है, जिससे कम से कम 35 लाख एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकते हैं।
ऐसे हुआ रेस्क्यू
कैप्टन वीरेंद्र विश्वकर्मा की पत्नी निल्पा विश्वकर्मा ने कहा कि, मेरे पति कैप्टन वीरेंद्र भारतीय नौसेना के साथ लगातार संपर्क में थे। मंगलवार रात को ईरान सरकार के साथ बातचीत के बाद उन्हें भारतीय नौसेना से सिग्नल मिला।
भारतीय नौसेना ने फोन पर सभी निर्देश दिए और मेरे पति ने यात्रा शुरू की। मस्कट तक भारतीय नौसेना ने कॉल के जरिए दिशा-निर्देश दिए। भारतीय नौसेना की वजह से ही वे युद्ध क्षेत्र से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर सके।
मस्कट में भारतीय नौसेना के दो जहाज और एक हेलीकॉप्टर उनके साथ शामिल हो गए। भारतीय नौसेना ने कप्तान और उनकी टीम की पूरी मदद की। मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे पति भारत वापस आ रहे हैं। 28 मार्च को वे गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचेंगे।


