बदायूं में 11 दिन से बंद पड़ा CBG प्लांट दोबारा से होगा शुरू, दिल्ली से आई टीम तय करेगी सुरक्षा और भर्ती

दोहरे हत्याकांड के बाद से बंद कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट के दोबारा संचालन की रूपरेखा मंगलवार को तय हो जाएगी। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशक व उनकी टीम प्लांट पहुंचकर नये सिरे से व्यवस्थाएं तय करेगी।

इसमें आउटसोर्सिंग भर्तियों पर भी बात होगी, क्योंकि हत्याकांड के बाद सबसे अधिक सवाल इसी पर उठे थे। बदले माहौल में प्लांट प्रबंधन का रुख सख्त और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होगी।

सैजनी गांव में जनवरी 2024 में हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने पराली से ईंधन बनाने वाले सीबीजी प्लांट का संचालन शुरू किया था। इसकी क्षमता प्रतिदिन 14 मीट्रिक टन ईंधन उत्पादन की है। इससे प्रतिदिन 65 मीट्रिक टन जैविक खाद भी तैयार की जा सकती है।

12 मार्च को इसी गांव में रहने वाले अजय प्रताप सिंह ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम के मुख्य महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता एवं सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या कर दी थी। वह छह महीने पहले आउटसोर्सिंस नौकरी से निकाले जाने एवं पराली ठेका निरस्त किए जाने से बौखलाया हुआ था।

85 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त

उस घटना के बाद से आरोप लगे कि जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर एक ही जाति के अधिकतर युवकों को नौकरी पर रखा गया, जो हनक दिखाते थे। इसी आधार पर 17 मार्च को एन-3-ई टेक्नालाजी प्राइवेट लिमिटेड ने आउटसोर्सिंग के सभी 85 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं।

दूसरी ओर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अफसरों ने प्लांट के दोबारा संचालन के लिए डीएम अवनीश राय से कई चरणों में फोन पर बात की। जिसके बाद तय हुआ कि मंगलवार को कार्यकारी निदेशक के साथ टीम प्लांट पहुंचकर दोबारा संचालन की रूपरेखा बनाएगी।

इसमें सबसे पहले 85-90 आउटसोर्सिंग भर्तियों पर बात होगी। इन कर्मियों को 14-18 हजार प्रतिमाह मानदेय पर बतौर वेंडरिंग, सुरक्षा व्यवस्था आदि कार्यों में लगाया जाता है। इस बार के भर्ती आवेदकों का चरित्र सत्यापन में पुलिस की मदद भी ली जा सकती है। इसके साथ ही, प्लांट की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा व्यवस्था पहले से सुद्ढ़ होनी है।

इसके लिए हत्याकांड के तुरंत बाद प्लांट में पुलिस चौकी बनाई जा चुकी, पीएसी भी तैनात है। माना जा रहा कि एक सप्ताह में सभी व्यवस्थाएं पूरी कर प्लांट का दोबारा संचालन किया जा सकता है। पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि हत्याकांड से दो दिन पहले तक प्लांट से प्रतिदिन 15 से 20 लोडेड टैंकर रवाना किए जाते थे।

प्रत्येक टैंकर में सात सौ से आठ सौ लीटर गैस भरी होती थी। उस समय 70 लाख रुपये से अधिक कीमत की पराली भी प्लांट में पड़ी थी, जो 11 दिन संचालन बंद होने से खराब हो गई होगी। प्लांट बंद होने से एक करोड़ रुपये के कच्चे माल के नुकसान की आशंका है।

एनकाउंटर की जांच करेंगे उझानी इंस्पेक्टर

दोनों अधिकारियों की हत्या करने के बाद आरोपित अजय प्रताप सिंह खुद कार लेकर मूसाझाग थाने पहुंच कर सरेंडर हो गया था। इसके बाद पूछताछ में उसने तमंचा मुड़सेना के जंगल में फेंकने की बात बताई थी।

इस पर 12 मार्च की रात को ही पुलिस तमंचा बरामद करने आरोपित को लेकर मुड़सेना के जंगल में गई थी। तब उसने पुलिस पर फायर कर दिया था। पुलिस ने मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार कर लिया था।

इस मामले में इंस्पेक्टर मूसाझाग वीरेंद्र तोमर वादी बने जबकि मुठभेड़ के दौरान क्राइम इंस्पेकटर भी वहां मौजूद थे। इसके चलते इस मामले की विवेचना सर्किल के ही थाने उझानी के इंस्पेकटर प्रवीण कुमार को दी गई है। उन्होंने इसमें नक्शा नजरी बनाने के साथ ही घटना स्थल का निरीक्षण भी किया है।

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