अब परिवहन विभाग के कैमरे की निगरानी में ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर (Automatic Testing Center) पर गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट होगा। दरअसल जगतपुर स्थित एटीएस को लेकर मंत्रालय की ओर से गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट आई थी।
वहीं, मुख्यालय के निर्देश के बाद जिला परिवहन पदाधिकारी ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करते हुए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है, जो पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेगी। जांच टीम में MVI राजीव रंजन और कुणाल कश्यप के साथ-साथ डाटा ऑपरेटर पंकज कुमार को रखा गया है।
डीटीओ जनार्दन कुमार ने बताया कि फिटनेस जांच के दौरान हर गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी और यह रिकॉर्डिंग (डीवीडी/डिजिटल फुटेज) कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखी जाएंगी।
इसका उद्देश्य किसी भी विवाद, दुर्घटना या जांच की स्थिति में सटीक प्रमाण उपलब्ध कराना है। डीटीओ ने बताया कि टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि फिटनेस प्रमाण पत्र (Fitness Certificate) जारी करने को लेकर किसी भी प्रकार का दबाव, सिफारिश या अवैध लेन-देन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निगरानी टीम को नियमित रूप से साप्ताहिक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने को कहा गया है।
15 मिनट में पूरी होगी जांच प्रक्रिया
डीटीओ ने बताया कि प्रत्येक वाहन की फिटनेस जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी। एक वाहन की जांच में अधिकतम 15 मिनट का समय तय किया गया है, ताकि प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित बनी रहे।यदि तय समय में जांच नहीं होती है या जानबूझकर देरी की जाती है, तो इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।


