बंथरा के नींवा गांव में हुए सामूहिक जहरकांड के बाद जहां पूरा गांव दंग है, वहीं घटना के पीछे के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक रूपनारायण का परिवार सामान्य लेकिन खुशहाल जीवन जी रहा था। चाय-समोसा और पान की दुकान से घर का खर्च चलता था।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में हालात धीरे-धीरे बिगड़ने लगे। करीब पांच वर्ष पहले बड़े बेटे संदीप का एक्सीडेंट हुआ, जिसमें इलाज पर तीन लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। इसके बाद परिवार कर्ज के बोझ तले दब गया।
इसी बीच तारावती भी दो वर्ष पहले हादसे का शिकार हो गईं। चबूतरे से गिरने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, जिससे बेड पर चली गई थी। हालांकि कुछ दिनों पहले वह
फिर से चलने-फिरने लगी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से घर पर अजनबी लोगों का आना-जाना बढ़ गया था।
10-12 दिन पहले कुछ लोग खुद को लोन रिकवरी एजेंट बताकर पहुंचे थे। हालांकि, परिवार की तरफ से इस बारे में कभी खुलकर चर्चा नहीं की गई। छोटे बेटे कुलदीप ने भी कर्ज या नोटिस की जानकारी होने से इनकार किया है, लेकिन गांव में इसे लेकर संदेह बना हुआ है।
रूपनारायण के भाई जगत चौरसिया बताते हैं कि सूचना मिलते ही उन्होंने प्रधान के जरिए पुलिस को खबर दी। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि छोटा बेटा कुलदीप शराब का आदी है और घर-परिवार की जिम्मेदारियों से दूरी बनाए रखता था। इसके चलते भी कर्ज से उबर नहीं सके।


