डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, प्रो-डेमोक्रेसी क्रांतिकारी और खुद को अमेरिकी फ्रीडम फाइटर कहने वाला 46 वर्षीय मैथ्यू वैनडाइक अब भारत की जेल में है। बाल्टीमोर में जन्मे इस शख्स ने दुनिया भर के युद्धक्षेत्रों में कैमरा से शुरू करके हथियार उठा लिया था। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एएनआई) उसे आतंकवाद से जुड़े आरोपों में पूछताछ कर रही है।
लिबिया में कैमरा से शुरू हुआ सफर, फिर खुद बना रिवॉल्यूशनरी
वैनडाइक की कहानी 2011 के अरब स्प्रिंग के दौरान लिबिया से शुरू हुई। वे गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों की डॉक्यूमेंट्री बनाने गए थे, लेकिन जल्दी ही रिवेल फाइटर्स के साथ हथियार उठा लिए। छह महीने तक कैद रहे, फिर त्रिपोली के गिरने के दौरान भाग निकले। इसी घटना ने उन्हें केवल फिल्मकार नहीं, लड़ाकू की छवि दी।
फिर सीरिया आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद स्वीकार किया कि उन्होंने विद्रोही गुटों को हथियार और रणनीति की सलाह दी थी। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से वेस्ट एशिया फोकस में सुरक्षा अध्ययन की मास्टर्स डिग्री लेकर उन्होंने विश्लेषण और एक्शन का अनोखा मिश्रण बनाया।
आतंकवाद के खिलाफ ट्रेनिंग का दावा
वैनडाइक ने अपने संगठन सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआई) के जरिए खुद को आतंकवाद और तानाशाही के खिलाफ लड़ने वालों का ट्रेनर बताया। इराक, वेनेजुएला, फिलीपींस और यूक्रेन में उनके ऑपरेशंस की तस्वीरें उनकी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।
एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था, हमारी नई यूनिट को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जो कभी बंदूक नहीं थामे थे, अब अच्छे शूटर बन गए हैं। वैनडाइक ने वेनेजुएला में कवर्ट मिशन का भी दावा किया था।
मिजोरम से म्यांमार घुसकर ड्रोन वारफेयर ट्रेनिंग का आरोप
भारतीय एजेंसियों का कहना है कि वैनडाइक और उनके छह यूक्रेनी साथी बिना जरूरी अनुमति के मिजोरम पहुंचे, फिर म्यांमार की सीमा पार करके जुमटा के खिलाफ लड़ रहे जातीय सशस्त्र गुटों को प्री-शेड्यूल्ड ट्रेनिंग दी।


