पुलिस पर हमले का आरोपी 46 वर्ष बाद बरी, हाई कोर्ट ने कहा- 97 साल की उम्र में जेल भेजना ठीक नहीं

 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला मामले में अभियुक्त 97 वर्षीय गंगा सहाय को 46 साल बाद बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आइपीसी की धारा 323 के अपराध के लिए अपीलार्थी को दोषी करार दिया गया है।

उसने पहले ही सजा भुगत ली है। वह जमानत पर है और 97 साल की आयु में उसे जेल भेजना उचित नहीं है। गंगा सहाय के खिलाफ जानलेवा हमले का आरोप साबित नहीं हुआ, ईंट-पत्थर चलाने का अपराध बनता है।

सत्र अदालत ने जानलेवा हमले का दोषी ठहराया था, किंतु ईंट-पत्थर फेंकने के आरोप से बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकलपीठ ने एकमात्र बचे अपीलार्थी गंगा सहाय की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सत्र अदालत का फैसला पलट दिया है।

46 साल पहले हुआ था मामला

एक फरवरी 1983 को चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अलीगढ़ द्वारा पारित निर्णय और आदेश के विरुद्ध आपराधिक अपील क्रमशः गोपी सिंह, गंगा सहाय, किशन प्रसाद और मिहि लाल की तरफ से दायर की गई थी। तीन अन्य अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन कथानक के अनुसार थाना बारला के एसआइ जय प्रकाश ने 26 दिसंबर 1980 को इस घटना की एफआइआर दर्ज कराई थी।

वादी मुकदमा के अनुसार वह दोपहर लगभग 3:10 बजे उपनिरीक्षक जय प्रकाश, कांस्टेबल तेज सिंह और याद राम सिंह के साथ गांव- मुदहैल में तेज सिंह के आवेदन की जांच करने के लिए पहुंचे थे।

 

तेज सिंह के दरवाजे पर दोनों पक्षों को बुला कर समझौता करने अथवा अपनी शिकायत के निवारण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी। इस पर गोपी सिंह, गंगा सहाय, किशन प्रसाद व मिहिलाल (गोपी सिंह का भतीजा) उत्तेजित हो गए। अपने चबूतरे पर खड़े होकर पत्थर व ईंट फेंकना शुरू कर दिया।

पुलिस पार्टी पर चलाई थी गोली

मिहिलाल ने देशी पिस्तौल निकाली और पुलिस पार्टी पर गोली चलाई, जिससे वे बच गए। दोनों कांस्टेबलों को पत्थर-ईंट से चोटें आईं। गांव के निवासियों करण सिंह, देव करण सिंह, पखपाल, तिरखा की मदद से पुलिस ने मिहिलाल को मौके पर पकड़ लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *