‘मोंथा’ तूफान से भारी नुकसान: बीज संकट और बिजली कटौती ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ की मार और सरकारी बीज समय पर नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। दलहनी, तेलहनी और गेहूं की फसलों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। किसानों को आशंका है कि इस बार उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है।

लेट बुआई से घटेगी उपज

किसानों का कहना है कि बीज की देरी से आपूर्ति के कारण पछात बुआई करनी पड़ी। इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ेगा। मसूर, खेसारी, मटर और चना जैसी फसलों की पैदावार कम होने की संभावना जताई जा रही है।

किसान दरबार में उठा मुद्दा

देवमलपुर बहुदरी पंचायत में आयोजित किसान दरबार में किसानों ने अपनी समस्याओं को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि अगर उत्पादन कम हुआ तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा और आर्थिक संकट गहरा सकता है।

सिंचाई के लिए बिजली बनी बड़ी समस्या

किसानों ने बताया कि खेतों में पोल और तार लगे होने के बावजूद समय पर बिजली नहीं मिलती। सिंचाई के लिए उन्हें डीजल पंप का सहारा लेना पड़ता है, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है और मुनाफा घट जाता है।

मौसम और सिस्टम दोनों से परेशानी

किसान भृगुनाथ यादव का कहना है कि जरूरत के समय हफ्तों तक बिजली नहीं रहती। वहीं मोहम्मद कैमुदीन ने बताया कि समय पर बीज नहीं मिलना और मौसम का उतार-चढ़ाव उनकी चिंता बढ़ा रहा है।

तेज धूप से भी फसल पर असर

विक्रमा यादव के अनुसार, लेट बुआई के साथ मार्च की शुरुआत से ही तेज धूप फसल के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। फसल खेत में दिख रही है, लेकिन अच्छी उपज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सरकारी मदद में देरी से बढ़ी चिंता

शालिग्राम पांडे ने कहा कि अनुदानित बीज तब मिलता है जब बुआई का समय निकल जाता है। वहीं मनजी सिंह ने बताया कि मटर की फसल ‘मोंथा’ तूफान से प्रभावित हुई, लेकिन अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।

समय रहते समाधान की जरूरत

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते बीज, बिजली और मुआवजे की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर न केवल उत्पादन पर बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर रूप से पड़ेगा।

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