सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मातृत्व संरक्षण एक मौलिक मानवाधिकार है, जिसे बच्चे के जन्म के तरीके के आधार पर छीना नहीं जा सकता।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता की उस धारा को असंवैधानिक करार दिया जो केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर अवकाश की अनुमति देती थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व संरक्षण एक मूलभूत मानवाधिकार है और परिवार बनाने के एक ‘गोद लिया हुआ बच्चा’ और ‘जैविक बच्चा’ कानून की नजर में समान हैं।


