सोन नदी के तटवर्ती क्षेत्र में इस वर्ष आलू की बम्पर उपज हुई है, लेकिन किसानों को उपज के अनुरूप बाजार भाव नहीं मिल रहा है। जिले और प्रखंड के बाजारों में पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बड़ी मात्रा में आलू आने के कारण स्थानीय किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
बोरे में भर तैयार रखा आलू
नतीजतन कई किसानों का आलू अब भी खेतों में पड़ा हुआ है। किसान मिथलेश सिंह, गुड्डू सिंह, अमित ने बताया कि खेत मे आलू तैयार है, मजदूरों से फसल निकलवा कर बोरे में भर तैयार रखा गया है, लेकिन व्यापारी खेत तक नहीं पहुंच रहे है, कीमत भी नहीं मिल रही है। सरकार को किसानों के हित के लिए आगे आने की जरूरत है।
दूसरा प्रदेश का आलू साफ-सुथरा और सुडौल
कायमनगर के व्यवसायियों ने बताया कि दूसरे प्रदेशों में भी इस वर्ष आलू की अच्छी पैदावार हुई है। वहां से आने वाला आलू साफ-सुथरा और सुडौल होता है तथा उसका लंबे समय तक भंडारण भी किया जा सकता है
इसी कारण व्यापारी बाहरी आलू को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं स्थानीय और बाहरी आलू की कीमत लगभग बराबर होने से भी किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है।


