निगाही परियोजना में कोयला परिवहन पर कमीशन का खेल? आखिर मीणा कौन?

सिंगरौली।निगाही खदान स्थित Northern Coalfields Limited (एनसीएल) की निगाही परियोजना में इन दिनों कोयला परिवहन को लेकर गंभीर आरोप चर्चा में हैं। सूत्रों और परिवहन से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि सड़क मार्ग से निकलने वाली कोयला गाड़ियों से कथित तौर पर प्रति टन 10 से 15 रुपये तक की कमीशन वसूली की जा रही है। आरोप यह भी है कि इस पूरे खेल में एक अधिकारी के इशारे पर काम होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार, कई ट्रांसपोर्टर कंपनियां ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से निम्न कोटि के “चुरा कोयला” लेने एवं परिवहन का कार्य लेती हैं और उसी के अनुरूप निर्धारित दर का भुगतान करती हैं। लेकिन आरोप है कि कथित सेटिंग के आधार पर कुछ मामलों में उच्च ग्रेड का कोयला संबंधित ट्रांसपोर्टर की गाड़ियों में लोड कर दिया जाता है।जिससे NCL को एक ओर नुकसान होता है और संबंधित ट्रांसपोर्टर को उच्च कोटि का कोयला भी मिल जाता है इस पूरे खेल में जिम्मेदार अधिकारी का जेब भी गर्म हो जाता है।

बताया जा रहा है कि इस कथित व्यवस्था के बदले 15 से 30 रुपये प्रति टन तक की अतिरिक्त वसूली की जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रोजाना हजारों टन कोयले का परिवहन

सूत्रों के अनुसार निगाही खदान से प्रतिदिन लगभग 5,000 से 10,000 टन तक कोयला सड़क मार्ग के माध्यम से विभिन्न स्थानों के लिए भेजा जाता है। ऐसे में यदि प्रति टन वसूली की बात सच साबित होती है तो यह रकम प्रतिदिन लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

कुछ ट्रांसपोर्टरों का यह भी कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कथित कमीशन देने से इनकार करता है तो उसके डीईओ (डिस्पैच या एंट्री से जुड़े दस्तावेज) को होल्ड कर दिया जाता है या गाड़ियों की एंट्री और कागजी प्रक्रिया में देरी की जाती है। इससे लोडिंग और परिवहन कार्य प्रभावित होता है और ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि इसी दबाव के कारण कई ट्रांसपोर्टर मजबूरी में इस व्यवस्था का हिस्सा बन जाते हैं।

प्रबंधन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। यदि इस प्रकार की अनियमितताएं वास्तव में हो रही हैं तो यह न केवल कंपनी बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। फिलहाल कंपनी प्रबंधन या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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