सिंगरौली।एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की दूधिचुआ परियोजना में कोयले के डिस्पैच को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि परियोजना में तैनात कुछ जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर कोयले के ग्रेड में खेल कर रहे हैं, जिससे कंपनी को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। चर्चा है कि इस पूरे खेल में डिस्पैच अधिकारी और कांटा बाबू की मिलीभगत से स्टीम कोयले के नाम पर अवैध कमाई का सिलसिला चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार परियोजना से निकलने वाली भारी वाहनों (बाड़ी गाड़ियों) में जिस कोयले को चुरा कोयला बताया जाता है, उसकी जगह स्टीम कोयला लोड कर बाहर भेजा जा रहा है। स्टीम कोयला उच्च गुणवत्ता का माना जाता है और इसकी कीमत भी अधिक होती है, लेकिन कागजों में इसे कम गुणवत्ता वाले चुरा कोयले के रूप में दर्शाया जा रहा है। इस अंतर का फायदा उठाकर कथित रूप से अवैध कमाई की जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस खेल में प्रति टन लगभग 30 रुपये का कमीशन तय किया गया है। यदि प्रतिदिन हजारों टन कोयले का परिवहन हो रहा है तो इससे प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध कमाई होने की चर्चा है। यह भी कहा जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ स्थानीय बिचौलियों और ट्रांसपोर्टरों की भी भूमिका हो सकती है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि परियोजना के भीतर लंबे समय से यह खेल चल रहा है, लेकिन अब इसकी चर्चा खुलकर होने लगी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब इतना बड़ा खेल चल रहा है तो परियोजना के महाप्रबंधक और अन्य जिम्मेदार अधिकारी इससे अनजान कैसे हैं? या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है।

जानकारों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और डिस्पैच रिकॉर्ड, कांटा पर्ची और लोडिंग के वास्तविक ग्रेड का मिलान किया जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है। इससे यह भी सामने आ सकता है कि अब तक कंपनी को कितने करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में एनसीएल प्रबंधन क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में इस कथित कोयला खेल की जांच होती है या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


