शुक्रवार को मां पूर्णागिरि धाम में 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। 27 फरवरी को मेला शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी तादाद पहली बार पहुंची है। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला गुरुवार की शाम से ही शुरू हो गया था। शुक्रवार सुबह भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूणागिरि के दर्शन के बाद श्रद्धालु नेपाल के ब्रह्मदेव स्थित सिद्धबाबा के दर्शन के लिए पहुंचे।
पिछले 72 घंटे तक टनकपुर व बनबसा बैराज से लगी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा सील होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आ गई थी। गुरुवार की रात मध्य रात्रि में सीमा खुलते ही श्रद्धालुओं की संख्या में अचानक तेजी आ गई। भीड़ बढ़ने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली। नेपाल में चुनाव के चलते भारत-नेपाल सीमा सील होने से श्रद्धालु टनकपुर शारदा बैराज से ब्रह्मदेव नहीं जा पा रहे थे, जिसके कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी आ गई।
शुक्रवार सुबह से ही बैराज से श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। सुरक्षा की दृष्टि से पूर्णागिरि में पुलिस को कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगानी पड़ी, जिससे श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुंचने में कई घंटे लग गए। कालिका मंदिर से नीचे टेड़ी पुलिया से मुख्य धाम तक तीर्थ यात्रियों से जगह व मार्ग खचाखच भरा हुआ था। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने बताया कि शुक्रवार की शाम तक 40 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे।
यात्रा मार्ग पर कई बार लगा जाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण शुक्रवार को पूर्णागिरि मार्ग के उचौलीगोठ-बूम पार्किंग स्थल में वाहनों को खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिल पाई। सुबह से ही बसों को नायकगोठ पैराग्लाइडिंग फील्ड के पास रोक दिया गया। कई बसों के श्रद्धालु पैदल ही पूर्णागिरि धाम को रवाना हुए तो कई श्रद्धालु मैक्स व अन्य साधनों से पूर्णागिरि धाम पहुंचे। टनकपुर से ठुलीगाड़ एवं बैराज मार्ग में कई जगह जाम की स्थिति पैदा हुई। जाम खुलवाने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।


