‘प्लेटफॉर्म पर सोने वाली नकली कहानी…’, बायोपिक के लिए जब संजीव कपूर से मांगा गया ‘दुखभरा स्ट्रगल’

भारतीय रसोई को नई पहचान देने वाले प्रसिद्ध शेफ संजीव कपूर (Sanjeev Kapoor) का मानना है कि प्रेरणा केवल संघर्षों और दुखभरी कहानियों से नहीं मिलती। यही वजह है कि कई प्रस्ताव मिलने के बावजूद वह अपनी बायोपिक को लेकर किसी भी जल्दबाजी में नहीं हैं।

उनका कहना है कि उनकी कहानी तभी पर्दे पर आनी चाहिए, जब उसे सकारात्मकता और जीवन के वास्तविक उतार-चढ़ावों के साथ ईमानदारी से दिखाया जा सके। बड़े पर्दे पर संजीव की कहानी लाने को लेकर कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन कुछ शर्तें हैं, जिन पर संजीव दृढ़ हैं।

बायोपिक के लिए लोग करते हैं कॉन्टैक्ट

वह कहते हैं कि मेरी बायोपिक को लेकर कई लोगों ने मुझसे संपर्क किया है। मेरा मानना है कि जिंदगी में यह सोचना चाहिए कि आप कैसे दूसरों को सकारात्मक तरीके से प्रभावित कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए केवल फिल्म ही एक जरिया नहीं है। मैं न्यूट्रिशन एजुकेशन के साथ जुड़ा हूं, जो कई लोगों को प्रभावित करती है। मेरी बायोपिक मनोरंजन के लिए बनेगी, वह प्रेरणादायक होगी, लेकिन वह तो कभी भी कर सकता हूं। मुझे उसके पीछे नहीं भागना है।

संजीव कपूर से मांगते हैं स्ट्रगल स्टोरी

जब कोई बहुत उत्सुक होगा, तो बनाएगा। अब तक मुझ पर कोई फिल्म इसलिए भी नहीं बनी, क्योंकि मैं सकारात्मक व्यक्ति हूं, मेरा जीवन भी वैसा ही रहा है। फिल्म के लिए जो लोग मिलने आते हैं, उनमें से कइयों ने कहा कि सर आप अपने संघर्ष और असफलताओं के बारे में बताइए। मैंने पूछा कि संघर्ष का क्या मतलब होता है कि मैं मुंबई आया, यहां मेरे पास खाने को खाना नहीं था, रेलवे प्लेटफार्म पर सोया।

मैं वह नहीं करना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता है कि प्रेरणा का मतलब यह होता है कि आप कहां से उठ खड़े हुए हैं। आम जिंदगी सहजता के साथ भी प्रेरणादायक हो सकती है। ज्यादातर लोगों की जिंदगी ऐसी ही है, लेकिन फिल्मों में स्टोरीटेलिंग होती है। जो मेरी सकारात्मक कहानी को उनके उतार-चढ़ावों के साथ दिखा पाएगा, उसे देने के लिए मेरे पास पूरा समय होगा।

रियलिटी शोज की बताई सच्चाई

कई रियलिटी शो के जज और अपने कई कुकिंग शो की मेजबानी कर चुके संजीव आगे खुद को रियलिटी शो में होने वाले ड्रामा से भी दूर रखते हैं। उन्हें वह ड्रामा पसंद नहीं आता है। संजीव कहते हैं कि मैं एक शो जज कर रहा था, जिसमें एक प्रतिभागी जब बाहर हो गया, तो उसने कहा कि सर मैंने सब कुछ तो किया, रोया, गाना गाया, डांस किया, कैमरा पर सारे भाव दर्शाए। फिर भी शो से बाहर हो गया। मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा, लेकिन मन में सोचा कि खाना भी तो बना लेते।

इंटरनेट मीडिया पर कुकिंग बनाने पर क्या बोले शेफ?

एक बात जो इंटरनेट मीडिया पर कुकिंग बनाने के क्षेत्र में मुझे पसंद आती है, वह यह है कि अब लोग खाना बनाना बोझ नहीं समझते हैं। वह उसे सेलिब्रेट करते हैं। उससे उन्हें पहचान भी मिल रही है। आम महिलाएं जिन्हें कभी उनके खाने से परिवार में मुस्कुराहट तक नहीं मिलती थी, उन्हें सराहना मिल रही है। पहले खाना बनाने को लेकर लिंग भेद था। मैं यह नहीं कहूंगा कि वह पूरी तरह से खत्म हो गया है, लेकिन उस पर चर्चा शुरू हो गई है कि महिला हो या पुरुष कोई भी खाना बना सकता है, उसमें कोई शर्म की बात नहीं है।

जैसे मेरी बेटी कहती हैं कि उनके पति उनके लिए खाना बनाते हैं। मार्केटिंग और प्रमोशन के दौर में क्या अब साधारण रियलिटी शो या कुकिंग शो लाना कठिन है? इसपर आगे संजीव कहते हैं कि आज भी लोग साधारण शो ही देखना चाहते हैं, ज्यादातर लोग को ड्रामा पसंद नहीं होता। आसपास जो शोर हो रहा है, उससे हटकर देखेंगे, समझ आएगा कि लोग क्या देखना चाहते हैं। कोरोना के दौरान दालगोना कॉफी और इन दिनों माचा के कई वीडियो देखने के मिलते हैं, लेकिन कितने लोग हैं, जो वह पी रहे हैं? हमें असली आंकड़े देखकर उसके अनुसार काम करना चाहिए।

रॉयल्टी पर बोले संजीव कपूर

इन दिनों रॉयल्टी को लेकर खूब बहस छिड़ी है। क्या संजीव को कभी नहीं लगता है कि वह अपनी बनाई किसी डिश को लेकर रायल्टी की मांग करें। इस पर वह कहते हैं कि जिस हवा में हम सांस लेतेहैं, नदियां जो पानी देती हैं, वो अगर अपना हक जमाने लग जाए या खुद को पेटेंट करा लें, तो क्या होगा। खाना किसान उगा रहा है, वह कहे कि टमाटर पर मेरा अधिकार है, क्योंकि मैंने उगाया है, तो क्या करेंगे। जीवन में कुछ चीजें ऐसी होनी चाहिए, जो बिना शर्त हों। रिश्ते, प्यार, ज्ञान, इससे व्यापार नहीं किया जा सकता है।

ज्ञान बांटने के लिए होता है, जो मैं कर रहा हूं। बाकी कमाने के बहुत रास्ते हैं। मैं तो कॉमेडी भी बहुत अच्छी कर लेता हूं, लेकिन उसके लिए पैसे नहीं लेता हूं। कुछ चीजें लोगों के लिए करनी चाहिए। हम सभी के पास सीमित समय होता है, उसमें चुनना पड़ता है कि आप किन चीजों पर ध्यान देना चाहते हैं। सब चीज करने जाएंगे, तो जो अच्छा कर रहे हैं, वह भी नहीं कर पाएंगे।

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