चंद्र ग्रहण के सूतक काल को देखते हुए नगर सहित आसपास के प्रमुख मंदिरों के कपाट मंगलवार सुबह से बंद कर दिए गए।
प्रशासन और मंदिर समितियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार जागेश्वर मंदिर, नंदा देवी मंदिर तथा अन्य स्थानीय देवालयों में प्रातः काल से ही नियमित पूजा-अर्चना स्थगित कर दी गई है।
मंदिरों के कपाट चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण प्रक्रिया पूर्ण कर पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण दोपहर 2:39 बजे प्रारंभ होकर सायं 6:18 बजे तक प्रभावी रहेगा।
सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से लगभग नौ घंटे पूर्व ही लग गया था, जिसके चलते मंदिरों में पूजा-पाठ, भोग और धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए गए।
मंदिर समिति के पूर्व उपाध्यक्ष नवीन भट्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ग्रहण अवधि के दौरान घरों में रहकर जप, ध्यान और पाठ करें।
ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में गंगाजल से शुद्धिकरण, विशेष आरती और पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में देव प्रतिमाओं को स्पर्श करना और भोजन ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए अल्मोड़ा के मंदिरों में एहतियातन यह व्यवस्था की गई।


