सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नीके बीच होने वाली शिखर वार्ता में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने की प्रतिबद्धता दोहराने जा रहे हैं।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में आई ठंडक के बाद यह बैठक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम होगा। बैठक का फोकस वर्ष 2023 से पहले द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए शुरू किये गये पहलों, समझौतों, वार्ताओं को नए जोश और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ फिर से शुरू करने पर होगा।
2016 में शुरू हुई थी ऊर्जा वार्ता
दोनों पक्ष ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, परमाणु सहयोग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संस्थागत संवाद तंत्र को पुनर्जीवित करने की हामी भरेंगे, द्विपक्षीय कारोबार के नये लक्ष्य तय करेंगे, आतंकवाद को लेकर एक दूसरे की चिंताओं को समझने की कोशिश करेंगे।
वैसे जनवरी, 2026 में गोवा में इंडिया इनर्जी वीक के दौरान भारत व कनाडा ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर फिर से बात की है। दोनों देशों के बीच सितंबर 2016 में ऊर्जा वार्ता की शुरुआत हुई थी, जिसे वर्ष 2018 में पूर्व पीएम जस्टिन ट्रुडो की भारत यात्रा के दौरान विस्तारित किया गया था लेकिन बाद में यह भी द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के भेंट चढ़ गया था।
अब इस ऊर्जा संवाद को नए लक्ष्यों के साथ दोबारा सक्रिय करने की तैयारी है ताकि स्वच्छ ऊर्जा, ग्रिड आधुनिकीकरण और हरित संक्रमण में साझेदारी बढ़ाई जा सके। अमेरिका से चल रहे तना-तानी के बीच कनाडा अपने विशाल कच्चे तेल व गैस भंडार के खरीददार की तलाश में है और भारत से बेहतर इसे दूसरा कोई बाजार नहीं मिल सकता।
इसी तरह से सूत्रों ने बताया है कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नये सिरे से बातचीत शुरू होने जा रही है। वैसे जून 2010 में हस्ताक्षरित और सितंबर 2013 से लागू परमाणु सहयोग समजौते (एनसीए) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग में सहयोग के लिए संयुक्त समिति गठित की गई थी।
भारत-कनाडा के संबंध
प्रधानमंत्री मोदी की अप्रैल 2015 की कनाडा यात्रा के दौरान भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कामेको कॉरपोरेशन के बीच 2015-2020 के लिए यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ था। सूत्रों के अनुसार अब दोनों पक्ष 10 वर्षीय नए अनुबंध को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जिससे भारत की दीर्घकालिक परमाणु ईंधन सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
प्रौद्योगिकी, दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष तीन ऐसे सेक्टर हैं जहां भारत व कनाडा के बीच सहयोग की नई संभावनाएं देखी जा रही हैं। 19 मई 2022 को ओटावा में हुई विज्ञान व प्रौद्योगिकी सहयोग समिति की 7वीं बैठक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) सहयोग की प्राथमिकताओं की निगरानी जारी रखने पर सहमति बनी थी।
अब दोनों देश इस ढांचे को आगे बढ़ाते हुए संयुक्त अनुसंधान, स्टार्टअप सहयोग और उभरती तकनीकों जैसे एआई और बायोटेक में नई परियोजनाएं शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। यह भी सोमवार को होने वाली बैठक का प्रमुख एजेंडा है। दोनों नेता व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को फिर से गति देने पर सहमत हो सकते हैं।
इस बार वार्ता को एक ठोस समय सीमा और चरणबद्ध लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि व्यापार और निवेश प्रवाह में ठहराव को दूर किया जा सके। दोनों देशों के बीच पहले भी इस बारे में बातचीत होती रही है जो वर्ष 2023 के बाद बाधित है।वर्ष 2023 में पूर्व पीएम ट्रुडो ने भारत पर आरोप लगाया था कि यहां की सरकार उसके नागरिकों की हत्या कराने की साजिश रच रही है।


