ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद बाराबंकी के किंतूर गम और गुस्सा

 ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना के बाद से जिले में सिरौलीगौसपुर के किंतूर गांव में गम और गुस्सा है। बाराबंकी में भी शोक की लहर है।

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना के बाद गांव के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईरान में रह रहे भारतीयों और आम नागरिकों की सलामती के लिए दुआ की। इसके साथ ही इजरायल और अमेरिका की ओर ईरान पर हमलों की कड़ी निंदा की गई।

बाराबंकी के सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव में रविवार तड़के जैसे ही इंटरनेट मीडिया के जरिए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना मिली तो गांव के लोग स्तब्ध हो गए। गांव में शोक का माहौल छा गया।

स्थानीय निवासी आदिल काजमी ने बताया कि सूचना मिलते ही लोग गमजदा हो गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर की मौत का गम बहुत है। हम सभी शोक मना रहे हैं और ईरान में रह रहे लोगों, खासकर भारतीयों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।

आदिल काजमी ने इजरायल और अमेरिका के हमलों को विश्व स्तर की गुंडागर्दी और आतंकी घटना करार देते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह इंसानियत को शर्मसार करने वाला मंजर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

गांव के निहाल अहमद काजमी सहित अन्य लोगों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उनका कहना है कि ईरान में बदलते हालात को लेकर किंतूर के लोगों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे जरूरी है कि वहां रह रहे भारतवासी और आम ईरानी नागरिक सुरक्षित रहें।

बाराबंकी से अयातुल्ला खामेनेई का संबंध

ईरान-इजरायल तनाव के बीच बाराबंकी का किंतूर गांव एक बार फिर चर्चा में है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के नेता रुहोल्लाह अयातुल्ला खामेनेई के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से बताया जाता है। स्थानीय परिवारों के अनुसार, खुमैनी का खानदान वर्षों पहले यहां से ईरान गए थे, लेकिन उनकी जड़ें आज भी अवधी की इस माटी से जुड़ी मानी जाती हैं।

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