सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई संस्थान अब बाल मरीजाें की दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कालेज के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय दुर्लभ रोग दिवस से पूर्व संस्थान में आयोजित विभाग के स्थापना दिवस व वैज्ञानिक संगोष्ठी में देशभर के वरिष्ठ चिकित्सकों ने पीजीआई को जेनेटिक विभाग की विशेषताओं के आधार पर नोडल हब बनाने की पहल की।
मुख्य अतिथि एनएएमसी नई दिल्ली में मेडिकल जेनेटिक विभाग की डायरेक्टर (प्रो) डॉ. सीमा कपूर और विशिष्ट अतिथि डा. रूचिरा एम गुप्ता व निदेशक डा. एके सिंह ने दीप जलाकर शुभारंभ किया।
एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स नोएडा के साथ देश के 100 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में दुर्लभ रोग के प्रति जागरूकता, शीघ्र निदान, बाल चिकित्सा में आनुवांशिक जांच व प्रबंधन की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। डा. सीमा कपूर ने कहा कि चाइल्ड पीजीआइ में जेनेटिक विभाग ने कई मरीजों की सफल इलाज किया है।
संस्थान में सुविधा और व्यवस्था के आधार पर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि बंगाल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत अन्य राज्यों के मरीजों का विश्वास बढ़ा है। डा. रुचिरा एम. गुप्ता ने बाल दुर्लभ रोग प्रबंधन में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि, चाइल्ड पीजीआइ को भविष्य के लिए नोडल हब बनाने की दिशा में काम किया जाए।
चिकित्सा आनुवांशिकी विभाग के डा. मयंक निलय ने बताया कि पिछले एक वर्ष में तीन हजार ओपीडी कंसल्टेंशन किए गए। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात से आठ शोध करने में सफलता मिली। नवंबर माह से आज तक सर्वाधिक 95 मरीजों की जेनेटिक जांच की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आटिज्म के मरीजों को सुविधा देने के लिए जल्द ही सुविधा शुरू होगी। इसमें अभिभावकों को बाल मरीजों की देखभाल का तरीका समझाया जाएगा।
वरिष्ठ साइंटिस्ट डॉ. दिनेश साहू ने बताया कि पीजीआई में मरीजों के लिए कई जेनेटिक टेस्ट शुरू हो चुके हैं। उन्होंने जन्मजात रोगों के बारे में विशेष जानकारी दी। वहीं, एक बाल योद्धा की मां नेहा मित्रा ने भी जेनेटिक बीमारियों पर अपना अनुभव साझा किया। निदेशक प्रो. डा. अरूण कुमार सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने संस्थान में सुविधाएं बढ़ाने के लिए कार्ययोजना पर भी चर्चा की। इस दौरान डीन डॉ. डीके सिंह, सीएमएस प्रो. डा. मुकुल जैन आदि मौजूद रहे।


