विधानसभा के बजट सत्र में इस बार का प्रश्नकाल कई मायनों में अलग था। विधायकों ने पारंपरिक प्रश्नों से अलग राष्ट्रव्यापी समस्या से जुड़े कई प्रश्न उठाए। इनके जवाब भी आए। क्षेत्र में उच्च शिक्षा की भी बातें हुईं। कई सवाल ऐसे आए जिस पर पक्ष और विपक्ष के विधायक एक मत दिखे।
प्रश्नकाल के दौरान एक दिन यह सवाल WHO की रिपोर्ट के आधार पर यह आया कि मोबाइल पर बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने को ले सरकार क्या कर रही? यह सवाल राष्ट्रव्यापी समस्या के तहत था। सरकार की ओर से इसका जवाब भी आया। यह कहा गया कि सरकार इसके लिए पॉलिसी ला रही।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक दिन रिटायर्ड कर्मियों के लिए कैशलेश इलाज की सुविधा से जुड़ा प्रश्न आया। यह रिटायर कर्मियों के प्रति संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा था।
सरकार ने इस पर जवाब भी दिया। यह कहा कि सीजीएचएस की तर्ज पर कैशलेश इलाज की व्यवस्था से सरकार को कोई परेशानी नहीं है।
महिला से लेकर किसानों तक के मुद्दे
आशा कार्यकर्ताओं के लिए रेस्ट रूम की व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न भी आया। किसी एक क्षेत्र विशेष की समस्या से जुड़े प्रश्न को छोड़ सभी क्षेत्रों की समस्या से जुड़े प्रश्न विधानसभा के प्रश्न काल में इस बार अधिक आए।
इसी श्रेणी का एक प्रश्न असर्वेक्षित जमीन के दाखिल खारिज नहीं होने का महत्वपूर्ण मामला था। एक प्रश्न सभी क्षेत्र के किसानों से जुड़ा था कि बिहार राज्य बीज निगम द्वारा कोल्ड स्टोरेज में आलू के बीजों के भंडारण बंद कर दिए जाने से किसानों को सस्ती दर पर आलू का बीज मिलने में परेशानी हो रही है।
मियावाकी तकनीक से नगर निकाय क्षेत्रों में हरित आवरण से पौधरोपण का विषय भी लाया गया। कचरे के पहाड़ की वजह से उत्पन्न परेशानी का मामला भी कई शहरों से जुड़ा हुआ विषय था।
EWS श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए कई दिन सवाल आए। एक दिन इन्हें अन्य आरक्षित वर्गों की तरह पांच अंक का ग्रेस दिए जाने तथा एक दिन उम्र सीमा में छूट दिए जाने का विषय उठाया गया।
एक साथ हुआ पक्ष-विपक्ष
कई दिन प्रश्नकाल में यह दृश्य भी दिखा, जब एक ही मसले पर पक्ष और विपक्ष के विधायक एक दिखे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रहा मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की राशि को बढ़ाए जाने का विषय था। यह मामला ध्यानाकर्षण के माध्यम से लाया गया था।


