जिले के सिंगरौली एवं महदईया रेलवे साइडिंग पर इन दिनों बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के कथित आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि यहां डिमरेज (Demurrage) शुल्क और रेलवे भूमि पर कोयले के भंडारण से जुड़े नियमों में व्यापक स्तर पर गोलमाल किया जा रहा है। ये दोनों स्टेशन धनबाद रेल मंडल (डीआरएम धनबाद रेंज) के अधीन आते हैं, जिसके कारण मामला और भी गंभीर हो जाता है।
क्या है पूरा मामला?
रेलवे के नियमों के अनुसार किसी भी गुड्स आइटम को वैगन में लोड करने के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय होती है। यदि संबंधित ट्रांसपोर्टर या एजेंसी तय समय के भीतर वैगन लोड नहीं कर पाती, तो रेलवे द्वारा डिमरेज शुल्क लगाया जाता है। यह शुल्क रेलवे की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
कथित तौर पर सिंगरौली और महदईया साइडिंग पर इस नियम का पालन कागज़ों में तो दिखाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में देरी से लोडिंग होने के बावजूद डिमरेज शुल्क या तो कम लगाया गया या फिर पूरी तरह से माफ कर दिया गया।

रेलवे भूमि पर कोयले का भंडारण भी सवालों के घेरे में
आरोप यह भी है कि रेलवे प्लेटफॉर्म एवं यार्ड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण किया गया है। नियमानुसार, यदि रेलवे की भूमि का उपयोग भंडारण के लिए किया जाता है तो संबंधित पार्टी से निर्धारित शुल्क वसूला जाना अनिवार्य होता है।
लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यहां के गुड्स इंचार्ज द्वारा कुछ ट्रांसपोर्टरों को अपने स्तर पर विशेष छूट दी गई है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे रेलवे को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है।
गुड्स इंचार्ज की भूमिका पर सवाल
इन आरोपों के केंद्र में संबंधित गुड्स इंचार्ज हैं, जो वर्तमान में सुर्खियों में बने हुए हैं। आरोप है कि ट्रांसपोर्टरों के साथ सांठगांठ कर डिमरेज और भंडारण शुल्क में मनमानी छूट दी जा रही है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय स्तर पर अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी या विजिलेंस द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हो सकता है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई संभव है।
फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब देखना होगा कि भारतीय रेल इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।


