आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय की पहल से बदल रही खान-पान की आदतें, बीमारियों से बचाव का बन रहा जनआंदोलन

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 बदलती जीवनशैली और अनियंत्रित खान-पान ने गंभीर बीमारियों को आम बना दिया है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्राल जैसी समस्याएं अब उम्र नहीं देख रहीं।

ऐसे समय में यदि भोजन ही औषधि का काम करने लगे तो यह केवल व्यक्तिगत राहत नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

अयोध्या स्थित आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय की एक पहल इसी सोच को साकार रूप दे रही है, जहां मोटे अनाज को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।

विश्वविद्यालय परिसर में सामुदायिक महाविद्यालय की विशेष किचन में बाजरा, ज्वार, रागी जैसे श्रीअन्न से विविध व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। यहां बाजरे और ज्वार की रोटी से लेकर रागी की इडली, डोसा, बाजरे की खिचड़ी, मक्के के ढोकले, लड्डू, उपमा, थेपला तक बनाए जाते हैं।

इतना ही नहीं, बिस्किट, केक, ब्रेड, नूडल्स और पास्ता जैसे आधुनिक व्यंजन भी मोटे अनाज से तैयार कर यह संदेश दिया जा रहा है कि सेहतमंद भोजन स्वाद से समझौता नहीं करता। इन उत्पादों की उपलब्धता आमजन के लिए भी है, जिससे स्वस्थ खान-पान केवल चर्चा का विषय न रहकर व्यवहार का हिस्सा बन सके।

अयोध्या निवासी होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डा. अमित गुप्ता बताते हैं कि मोटे अनाज में प्रचुर मात्रा में फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनका नियमित सेवन पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, कब्ज की समस्या कम करता है और शरीर में कोलेस्ट्राल के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।

उनका कहना है कि मोटे अनाज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने से मधुमेह के रोगियों को विशेष लाभ मिलता है, वहीं उच्च रक्तचाप को संतुलित रखने और वजन नियंत्रित करने में भी यह उपयोगी है। यानी यह केवल भोजन नहीं, जीवनशैली सुधार का माध्यम बन सकता है।

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