बुंदेलखंड के चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर और जालौन जनपदों में करीब 10 ऐसे प्रमुख पुल हैं, जो अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं, लेकिन आज भी हजारों वाहनों का भार झेल रहे हैं। इनमें कई पुल 70 से 75 वर्ष पुराने हैं।
समय के साथ इनकी संरचना कमजोर हुई है, दीवारों पर घास-फूस उग आई है और कई स्थानों पर क्षति के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद इन पुलों से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजर रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
लगातार बढ़ रहा ओवरलोड वाहनों का दवाब
चित्रकूट में झांसी-मीरजापुर नेशनल हाईवे-35 पर मंदाकिनी नदी का पुल वर्ष 1952 में बना था। लगभग 75 वर्ष पुराने इस पुल से रोजाना 10 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। वर्ष 2003 की बाढ़ में पुल के हिलने की घटनाएं सामने आने के बाद भी यह आज तक उपयोग में है। इसके समानांतर 17.46 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जा रहा है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिले में हाईवे पर भांगा स्थित बरुआ नदी पुल भी वर्ष 1957 के बना है। जो 70 साल पुरानी है। जबकि कर्वी-राजापुर हाईवे पर मोहरवां पुल, राजापुर-मऊ राज्य मार्ग में छीबों पुल और कर्वी मानिकपुर मार्ग में बना ऐंचवारा पुल भी 50 वर्ष पुराने हो चुके हैं। कई पुलों पर गड्ढे बन गए हैं और रात में प्रकाश व्यवस्था का अभाव रहता है। भरतकूप क्षेत्र की ग्रेनाइट मंडियों और बालू खदानों से निकलने वाले ओवरलोड वाहनों का दबाव भी इन पुलों पर लगातार बढ़ रहा है।
बांदा जनपद में बागे नदी पर बना पुल भी वर्ष 1952 का है और करीब 75 वर्ष पुराना हो चुका है। महोबा के कुलपहाड़ क्षेत्र में नौगांव-कुलपहाड़ मार्ग का पुल 50 वर्ष से अधिक पुराना है। वहीं जालौन के कालपी में कानपुर-झांसी हाईवे पर यमुना नदी का 56 वर्ष पुराना पुल हाल ही में तकनीकी खामियों के कारण मरम्मत के लिए बंद किया गया था।


