हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दलों की परीक्षा लेने को तैयार है। भाजपा से राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी का कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने जा रहा है। इस रिक्त सीट को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
कांग्रेस की चिंता इस बात को लेकर है कि इस बार किसे उम्मीदवार बनाया जाए। पार्टी के कई राष्ट्रीय नेता भी इस सीट पर नजर गड़ाए हुए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी नेताओं की कमी नहीं है, जिससे चयन की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों दिल्ली में हुई बैठक में इस मुद्दे पर गहन मंथन किया गया। वर्ष 2024 में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा था और भाजपा ने राज्यसभा की सीट छीन ली थी। उस समय भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन चुनाव जीत गए थे, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक संकट भी खड़ा हो गया था।
इस बार कांग्रेस पिछली गलतियों को दोहराने से बचना चाहती है। पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति फिर न बने। वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। इन्हीं मतों से नए राज्यसभा सदस्य का चुनाव होना है।
विपक्षी दल भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पर पैनी नजर बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है तो सीट उसके पक्ष में जा सकती है, लेकिन यदि गुटबाजी हावी हुई तो भाजपा को फायदा मिल सकता है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर हिमाचल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम और रणनीति स्पष्ट होने के बाद तस्वीर और साफ होगी।


