छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म के मामले में हाई कोर्ट ने पलटा फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला, स्कूल के फादर को उम्रकैद

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 छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

वारदात को छिपाने की दोषी दो महिला कर्मचारियों को सात-सात साल के जेल और पांच-पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है। फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बैकुंठपुर के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तीनों दोषियों को बरी कर दिया गया था।

कोरिया के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के छात्रावास में रहने वाली कक्षा चौथी की नौ वर्षीय छात्रा से नौ सितंबर, 2015 को फादर जोसेफ धन्ना स्वामी ने दुष्कर्म किया था। इसकी शिकायत बच्ची ने स्कूल की सिस्टर फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया से की, तो उन्होंने मदद करने के बजाय छड़ी से उसकी पिटाई कर दी।

इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था।फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को राज्य शासन ने दी थी चुनौतीमामले की सुनवाई के बाद नौ जनवरी, 2017 को बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव की बात कहते हुए तीनों आरोपितों को बरी कर दिया था।

राज्य सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अब बिलासपुर हाई कोर्ट ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण ठहराया है। हाई कोर्ट ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में डॉ. कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटों और सूजन की पुष्टि हुई थी।

एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर शुक्राणु पाए गए थे, जो अपराध की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दुष्कर्म पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है।

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