सिंगरौली।नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की गोरबी ब्लॉक बी परियोजना में कोयले की गुणवत्ता को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, परियोजना में जी-10 ग्रेड के कोयले की जगह जी-5 ग्रेड का कोयला निकासी और डिस्पैच किए जाने का खेल चल रहा है। इस कथित गड़बड़ी में कांटा बाबू, सेल्स ऑफिसर और कुछ ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत की बात कही जा रही है।

150 रुपये प्रति टन अवैध कमीशन का आरोप
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में प्रति टन 150 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि कागजों में निम्न गुणवत्ता (जी-10) दर्शाकर उच्च गुणवत्ता (G-5) का कोयला भेजा जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
तौल और ग्रेडिंग प्रक्रिया पर उठे सवाल
परियोजना में तैनात कांटा बाबू की भूमिका पर विशेष सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि तौल पर्ची और ग्रेडिंग रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर कर वास्तविकता से अलग विवरण दर्ज किया जा रहा है। सेल्स विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिससे पूरी डिस्पैच प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

ट्रांसपोर्टरों की संलिप्तता की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, कुछ ट्रांसपोर्टर भी इस कथित खेल में शामिल हैं। लोडिंग से लेकर डिस्पैच तक पूरी प्रक्रिया में आपसी तालमेल के जरिए अनियमितता को अंजाम दिए जाने की बात सामने आ रही है।
प्रबंधन पर भी उठ रहे सवाल
बताया जा रहा है कि इस मामले की जानकारी परियोजना के महाप्रबंधक तक भी पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे प्रबंधन की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला बड़े आर्थिक घोटाले का रूप ले सकता है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। फिलहाल, इस संबंध में परियोजना प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सभी की नजरें जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


