बस्ती में पूर्वजों की जन्मस्थली देखने पहुंचा आस्ट्रेलियाई दंपती, 1906 में फिजी भेजे गए थे परनाना
अंग्रेजी शासनकाल के दौरान वर्ष 1906 में बस्ती जिले के सरैया अतिबल गांव से प्रभु फिजी गए थे। सोमवार को उनकी छठी पीढ़ी उनके सरजमी को देखने ऑस्ट्रेलिया से सरैयाअतिबल पहुंची।
कई वर्षों के अथक प्रयास के बाद अपने पूर्वजों की जन्मस्थली पहुंचे दंपती के चेहरों पर खुशी थी। गांव के लोग भावुक हो उठे। अपने पूर्वजों की धरती पर आकर विनेश चन्द्रा और उनकी पत्नी रमीला चंद्रा के चेहरे खिल गए।
अंग्रेजी शासन काल के दौरान 1906 से 1911 तक करीब 60000 लोगों को फिजी भेजा था। इनमें से कई परिवार अपने पैतृक गांव से बिछड़ गए और वर्षों तक उनका कोई संपर्क नहीं रहा। लेकिन धीरे-धीरे कई बरसों बाद लोग अब अपने पूर्वजों की जन्मस्थली को ढूंढते हुए पहुंच रहे हैं उन्हें में से एक है विनेश चन्द्रा, जो मौजूदा समय में आस्ट्रेलिया ब्रिस्बेन शहर में स्थित क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
जो अपने पत्नी रमीला चंद्रा व रिश्तेदार मौरिस पिएट्रोबोन और पिएट्रबोन के साथ पूर्वजों के जन्मस्थली पहुंचे। फोन पर बातचीत के दौरान विनेश चन्द्रा ने बताया प्रभु उनके परनाना थे। जिनकी चर्चा अक्सर हमारे घर में होती रहती थी और भारत से जुड़ने के लिए हम लोग आस्ट्रेलिया से दिल्ली पहुंचे।
दिल्ली से अयोध्या आए और अयोध्या से पूर्वजों की जन्मस्थली तक पहुंचे जहां से वह बस्ती के कलवारी तथा बलरामपुर जिला भी गए थे। जहां अन्य रिश्तेदारों के भी जन्मस्थली को दिखा।
उन्होंने बताया सरैया अतिबल गांव पहुंचते ही जब गांव के बृजेश सिंह, नरेंद्र सिंह, शैलेंद्र विक्रम सिंह सहित अन्य लोगों से मुलाकात की तो बहुत ही अच्छा लगा। लोगों ने उनका स्वागत भी किया। मौका मिलने पर वह फिर भारत भ्रमण पर आएंगे तो बस्ती जिले में रात्रि निवास कर अन्य लोगों से भी मुलाकात करेंगे।


