स्थान प्रयागराज जंक्शन… घड़ी की सुइयां थमी थीं, सोमवार सुबह का समय था, यात्रियों का धैर्य जवाब दे रहा था। मुंबई से आई एलटीटी-कानपुर सुपरफास्ट विशेष ट्रेन जब 22 घंटे की देरी के बाद जंक्शन पहुंची तो वहां स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि यात्रियों के आक्रोश और उठती दुर्गंध से हुआ। यह सिर्फ एक ट्रेन की कहानी नहीं है, बल्कि प्रयागराज से गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में अव्यवस्था की हकीकत है जो रेलवे के ‘चकाचक’ दावों के मुंह पर करारा तमाचा मार रही है।
नेताजी एक्सप्रेस में ‘कैद’ हुआ परिवार
शुरुआत होती है नेताजी एक्सप्रेस के एस-वन कोच से। यात्री शंभू अपनी पत्नी, बुजुर्ग मां और बच्चों के साथ सीट नंबर एक से छह पर सवार थे। कहने को सीटें ‘कंफर्म’ थीं, लेकिन कोच का नजारा किसी जनरल बोगी से भी बदतर था। बेटिकट यात्रियों की इतनी भारी भीड़ घुस गई कि शंभू का परिवार अपनी ही सीट पर बंधक बन गया। भीड़ इतनी कि टॉयलेट तक जाने का रास्ता नहीं था। एक्स पर मदद मांगी गई, डिजिटल इंडिया के पहिए घूमे, अधिकारियों के रिप्लाई भी आए लेकिन धरातल पर मदद ‘शून्य’ रही। यात्री गुहार लगाते रहे और बेटिकट यात्री सीटों पर जमे रहे।
हमसफर में ‘गंदगी का अंबार’
इधर, हमसफर एक्सप्रेस के बी-थ्री (B3) कोच में सफर कर रहे रोहित शर्मा की आपबीती रेलवे की स्वच्छता की पोल खोलती है। प्रीमियम ट्रेन, प्रीमियम किराया लेकिन सुविधाएं ‘थर्ड क्लास’। बाथरूम का फ्लश टूटा हुआ और शौचालय गंदगी से लबालब बजबजा रहा था। रोहित का आरोप है कि एक तरफ रेलवे इंटरनेट मीडिया पर अपनी साफ-सफाई की पीठ थपथपा रहा है और दूसरी तरफ यात्री उसी गंदगी के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
22 घंटे की देरी और मच्छरों का ‘जानलेवा’ हमला
सबसे खराब स्थिति एलटीटी-कानपुर सुपरफास्ट स्पेशल की रही। 22 घंटे की देरी से पहुंची इस ट्रेन के कोचों में मच्छरों का ऐसा साम्राज्य था कि यात्रियों का बैठना मुहाल हो गया। यात्री विक्की तिवारी ने आक्रोश जताते हुए पूछा “अगर इन मच्छरों के काटने से मेरे छोटे बच्चे बीमार हुए, तो जिम्मेदार कौन होगा?” सुधीर ढाका के बीमार माता-पिता गंदगी के कारण टॉयलेट तक इस्तेमाल नहीं कर पाए। प्रयागराज जंक्शन पर ट्रेन खड़ी रही, यात्री तड़पते रहे, तस्वीरें साझा करते रहे, लेकिन सिस्टम की नींद नहीं टूटी।
डिजिटल जवाबदेही: ‘ढाक के वही तीन पात’
इस पूरे घटनाक्रम पर डीआरएम प्रयागराज रजनीश अग्रवाल ने सीनियर डीएमई को निर्देशित तो किया, लेकिन नतीजा वही रहा ‘फाइलों का इधर से उधर सरकना’। सीनियर डीसीएम भी निर्देश के बाद सक्रिय हुई लेकिन एक्स पर ही रिप्लाई कर खानापूर्ति करते रहे। अधिकारियों के निर्देश सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट में ही कैद होकर रह गए।


