रोटी मडुआ खाएंगे, बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाएंगे

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सिर पर पके बाल, चेहरे पर झुर्रियां, मुंह में गिने-चुने दांत, लेकिन आंखों में अपनी जमीन का हक पाने की उम्मीदें। लाठी का सहारा लिए बिंदुखत्ता स्थित जनता इंटर कालेज में विशाल एकता रैली में पहुंचीं पार्वती देवी जिंदगी के 82 वसंत देख चुकी हैं और हर सरकार से मिला धोखा भी। लेकिन, आज भी उनकी हर सांस में एक आस है कि उनके जीते जी बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा मिल जाएगा। उनकी आवाज में आवाज मिलाने के लिए बुधवार को बिंदुखत्ता में हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े, पूर्व सैनिक, दिव्यांग, खिलाड़ी हर कोई इसमें शामिल था।

जनता इंटर कालेज के मैदान में अपनी आवाज बुलंद करने को सुबह 10 बजे से ही लोग पहुंचने लगे थे। धीरे-धीरे भीड़ इतनी बढ़ गई कि चाहरदीवारी, छतों पर लोग बैठने लगे। मंच से एक-एक करके बिंदुखत्ता संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने राजस्व गांव की मांग रखी। हर एक आवाज पर जनसभा में बैठे लोग जबरदस्त हुंकार भर रहे थे। मानो बिंदुखत्ता के लोग अपनी मांग मनवाकर ही मानेंगे। लोगों के हुजूम में जोश के साथ-साथ अनुशासन भी था और पूर्व सैनिक व्यवस्था बनाने के लिए पूरी तरह से जुटे हुए थे। हर किसी को चिंता थी कि किसी भी तरह से आंदोलन की छवि धूमिल न हो।

इसके बाद करीब 12 बजे इंटर कालेज के मैदान से विशाल एकता रैली निकली। इसमें लोगों ने रोटी मडुआ खाएंगे, बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाएंगे, बिंदुखत्ता मांगे राजस्व गांव, आज दो अभी दो बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दो जैसे नारे लगाए। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ की एक सुर में उठी इन आवाजों से बिंदुखत्ता से लेकर लालकुआं तक का इलाका गूंज उठा। इन आवाजों में दर्द, गम, गुस्सा सब था।

गीत के माध्यम से नेताओं पर कसा तंज

आंदोलन में लोग गीत गाते नजर आए। गीतों के माध्यम से वे बार-बार सरकारों से मिल रही वादाखिलाफी पर तंज कसते हुए भी नजर आए। मंच से एक पूर्व सैनिक ने कहा, वोट के बहाने से बिंदुखत्ता में फिर आओगे, तुम तो ठहरे परदेसी वादा क्या निभाओगे, 25 साल लगा दिए, राजस्व कब बनाओगे।

तिरंगा लेकर पूर्व सैनिक हुए शामिल

रैली में पूर्व सैनिक और लोग तिरंगा लेकर शामिल हुए। तिरंगे के माध्यम रैली में पहुंचे लोग एकजुटता प्रदर्शित कर रहे थे। कई संगठनों से मिलकर बनी बिंदुखत्ता संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले उमड़े लोगों की बस एक ही मांग थी कि बिंदुखत्ता को विधानसभा चुनाव से पहले राजस्व गांव घोषित किया जाए।

भूखे पेट महिला शक्ति ने आंदोलन में भरा दम

आंदोलन में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अधिक नजर आईं। कई महिलाएं भूखे पेट आई थीं। लगातार नारे लगाने से उनका गला सूख रहा था। वे प्यास से व्याकुल हो रही थीं, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने जनसभा से लेकर रैली तक दमदार तरीके से अपनी मांग रखी।

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