खेल नगरी इस सप्ताह वैचारिक विमर्श का भी केंद्र बनने जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम (20 व 21 फरवरी) के लिए मेरठ आ रहे हैं, जहां वे 28 जिलों के प्रबुद्धजन और खिलाड़ियों के साथ संवाद करेंगे।
देशभर में चल रहे उनके संवाद कार्यक्रमों की श्रंखला में मेरठ का पड़ाव इसलिए खास है, क्योंकि यहां पहला दिन खेल जगत को समर्पित रहेगा। संवाद का केंद्र केवल खेल उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि उन सामाजिक अनुभवों पर भी रहेगा जिनसे खिलाड़ी अपने सफर में गुजरते हैं। खिलाड़ी ही प्रदेश के बाहर अपने क्षेत्र व प्रदेश का चेहरा व विदेश में देश का चेहरा होते हैं। ऐसे में समरसता पर खिलाड़ी क्या सोचते हैं, यह जानना आवश्यक है। क्योंकि संघ के पंच परिवर्तन में समरसता प्रमुख है।
संघ पहली बार खिलाड़ियों के साथ संवाद कार्यक्रम करने जा रहा है। मेरठ का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां खिलाड़ियों से लेकर खेल उत्पाद तक ने देश का मान दुनिया में ऊंचा किया है। भुवनेश्वर, सुरेश रैना, प्रवीण कुमार, अर्जुन अवार्डी अलका तोमर समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया है। खिलाड़ियों से अनुभव पूछे जाएंगे, वहीं उनके प्रश्नों का जवाब डा. मोहन भागवत देंगे।
जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव या अनेकता में एकता के सवाल भी चर्चा के दायरे में होंगे। खेल के मैदान से उम्मीद की जाती है कि वहां पर सभी समान होंगे। सभी को बराबरी का दर्जा हासिल होगा। जहां जर्सी पर लिखा नाम और प्रदर्शन ही पहचान बनता है। खिलाड़ियों से यह भी समझा जाएगा कि उन्होंने सामाजिक बाधाओं को किस तरह चुनौती दी और क्या खेल वास्तव में सामाजिक समरसता का सेतु बन सकता है।
संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि खिलाड़ी आज युवाओं के सबसे प्रभावशाली रोल माडल हैं। ऐसे में यदि वे सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देते हैं, तो उसका व्यापक असर पड़ सकता है। मेरठ ने देश को कई ऐसे खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने देश-दुनिया में परचम लहराया है।
यह आयोजन केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेल और समाज के रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित करने का भी प्रयास है। मेरठ व ब्रज प्रांत से संबंधित 18 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 500 खिलाड़ी प्रतिभाग करेंगे। संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि संघ हमेशा खेलकूद, व्यायाम के लिए प्रेरित करता रहा है।


