भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद बुधवार को अपनी ही मांग पर फंस गए। उन्होंने ध्यानाकर्षण के जरिए सरकार से मांग की थी कि वह नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का मासिक भत्ता बढ़ाए।
उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतों के ग्रामीण प्रतिनिधियों को बढ़ा हुआ भत्ता मिल रहा है। नगर निकायों के प्रतिनिधियों को भी भ्रमण करना होता है, रुपया खर्च होता है, उनका भत्ता पिछले 10 वर्षों से नहीं बढ़ा है।
सरकार की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार जवाब दे रहे थे। उन्होंने तारकिशोर पर तंज कसा- आप वित्त और नगर विकास मंत्री थे। उस समय इन प्रतिनिधियों की चिंता क्यों नहीं हुई? तारकिशोर चुप हो गए।
हालांकि श्रवण ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मांग पर विचार करेगी। भाजपा के जीवेश मिश्रा ने भी इस मामले में दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार में जब वे नगर विकास मंत्री थे, यह प्रस्ताव आया था।
विभाग से प्रस्ताव गया भी, लेकिन कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिली। अब इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए। जीवेश को भी याद दिलाया गया था कि वह भी नगर विकास मंत्री रहे हैं।
धारा प्रवाह जवाब
विधायकों की आम शिकायत रहती है कि मंत्री उन्हें पूरा उत्तर नहीं देते हैं। लेकिन, जदयू के दुलालचंद गोस्वामी के एक ध्यानाकर्षण के जवाब के समय ठीक इसके उलट हुआ। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह दूषित पेयजल के बारे में गोस्वामी के ध्यानाकर्षण का जवाब दे रहे थे।
वे धाराप्रवाह बोल रहे थे। समय अधिक लगा तो विधानसभा अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार ने मंत्री को सलाह दी कि वे अपना जवाब सदन के पटल पर रख लें। उसे पढ़ा हुआ मान लिया जाएगा।


