गोरखपुर में रंगों की फुहार मारेगा ड्रैगन, रॉकेट से उड़ेंगे रंग

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 होली नजदीक आते ही बाजारों में उत्साह का वातावरण बनने लगा है। रविवार को पांडेयहाता स्थित थोक दुकानों पर होली के लिए सामग्री की बिक्री प्रारंभ हो गई। इस बार नई पिचकारियां आई हैं, जिन्हें प्रत्येक आयु वर्ग की रुचि को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

ड्रैगन, राकेट, त्रिशूल, डमरू सहित अन्य माडल की पिचकारियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। व्यापारियों के अनुसार दिल्ली से स्टाक मंगाया गया है। मंडल के अतिरिक्त नेपाल तक आपूर्ति की जाएगी।

पांडेयहाता में पिचकारी विक्रेता पवन कुमार ने बताया कि इस बार पारंपरिक पिचकारियों के स्थान पर धार्मिक प्रतीक, पराक्रमी पात्रों के अस्त्र, राजनेताओं के रूप वाली पिचकारियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी। महादेव का त्रिशूल, श्रीराम का धनुष और हनुमान की गदा रूपी पिचकारियों की भी मांग है। बच्चों में ड्रैगन, सैनिक बंदूक और राकेट आकार की पिचकारियां लोकप्रिय हैं। चुनाव चिह्नों वाली पिचकारियों की मांग है। वर्तमान में 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक कीमत की पिचकारियां उपलब्ध हैं।

विक्रेता सूरज ने बताया कि दिल्ली और कानपुर से आई पिचकारियां आकर्षक होने के साथ मजबूत भी हैं। त्रिशूल, तलवार, गदा और चक्र के रूप में लोगों का ध्यान खींच रही हैं। बच्चों के बीच मिक्की माउस और ड्रैगन पिचकारियों का आकर्षण है, जिनकी कीमत 100 से 400 रुपये तक है।

पादरी बाजार से आए ग्राहक दीपक ने बताया कि यहां उचित मूल्य पर पिचकारियां मिलती हैं। पांच वर्ष के बच्चे के लिए पिचकारी खरीद रही सुषमा ने कहा कि इतने प्रकार दिख रहे हैं कि पसंद की पिचकारी चुनना कठिन हो गया है।

असुरन के व्यापारी श्याम ने बताया कि अब बच्चों स्कूल बैग वाली पिचकारी ज्यादा पसंद आती है। लंबी दूरी तक बौछार करने वाली त्रिशूल पिचकारी काफी पसंद की जा रही हैं।

गायघाट की इत्या होली पर रंग- पिचकारी की दुकान लगाती हैं। उन्होंने बताया कि रविवार से बिक्री शुरू हुई है। एक- दिनों में होली का थोक बाजार रफ्तार पकड़ लेगा। साधारण पिचकारियां 50 रुपये से आरंभ हैं, जबकि बड़े आकार और विशेष क्षमता वाली पिचकारियां 1500 रुपये तक मिल रही हैं।

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