ममता, जो बच्चे की पहली ढाल मानी जाती है, उसी ममता पर सवाल खड़े कर देने वाला एक वीडियो इन दिनों शहर में चर्चा का केंद्र है। स्कूल से घर लौट रही एक बच्ची की पीठ पर किताबों के साथ ईंटों का बोझ है। वह भी उसी हाथों ने डाला है जिनसे उसे सहलाया जाना चाहिए था। यह दृश्य न केवल आंखें नम कर देता है, बल्कि समाज को झकझोर भी देता है।
चल नहीं पा रही थी लड़की
शहर के मिठनपुरा चौक इलाके का बताया जा रहा यह वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखता है कि एक बच्ची स्कूली यूनिफॉर्म में, भारी बैग ढोते हुए सड़क पर कदम बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बोझ इतना अधिक है कि बच्ची लड़खड़ाती है, रुक-रुक कर चलती है और रो पड़ती है।
उसके साथ चल रही महिला को बच्ची अपनी मां बताती है। वह किसी प्रकार की दया दिखाने के बजाय उसे डांटती, झिड़कती और मारती नजर आती है।
जब बैग खुला, तो निकलीं ईंटें
राहगीरों को बच्ची की हालत देख संदेह हुआ। लोगों ने हस्तक्षेप किया और बैग खुलवाया तो उसमें किताब-कॉपी के साथ चार ईंटें निकलीं। यह देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। सवाल पूछे गए—इतनी क्रूर सजा क्यों?
माहौल और तनावपूर्ण
जवाब में महिला और उग्र हो गई। उसने कहा, “मेरी बच्ची है, मैं जो चाहूं करूं।” विरोध करने पर महिला ने बच्ची को और पीटा, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
बीच-बचाव करने वालों से भिड़ीं
दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि कई लोग रुक गए। किसी ने समझाने की कोशिश की, किसी ने बच्ची को ढांढस बंधाया। लेकिन महिला किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी।
वह मदद करने आए लोगों से उलझ पड़ी और अंततः उग्र व्यवहार करते हुए बच्ची को घसीटते हुए वहां से ले गई। किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और वही वीडियो अब समाज के सामने आईना बनकर खड़ा है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फूट पड़ा। लोग इसे बाल उत्पीड़न का मामला बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि सार्वजनिक स्थान पर एक मासूम के साथ ऐसी हिंसा कैसे बर्दाश्त की जा सकती है? कई यूजर्स ने प्रशासन से बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिला की काउंसलिंग व कानूनी जांच की मांग की है।


