सुकून, सुंदरता और रोमांच का संगम है मालवा-निमाड़, यहां मुस्कुराती है प्रकृति और बोलता है इतिहास

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मध्य प्रदेश का मालवा-निमाड़ क्षेत्र आपको कश्मीर या शिमला की तरह सुकून, सुंदरता और वही रोमांच देता है, वह भी किफायती खर्च के साथ।

यहां न कड़ाके की ठंड है, न चुभती गर्मी। आसमान की लालिमा, पानी की शीतलता, घाटों की लय, किलों की शिल्पकला और नदी के बीच रोमांच- सब कुछ एक ही सफर में मिल जाता है।

पहला पड़ाव 

मांडू: सुनहरे अतीत में ले जाते हैं किले और महल आपको

धार जिले की पर्यटन नगरी मांडू को यूं ही सिटी आफ जाय नहीं कहा जाता। यहां के किले और महल आपको सुनहरे अतीत में ले जाते हैं। पत्थरों पर उकेरी शिल्पकला, आसपास फैली हरियाली और पहाड़ी हवा – सब मिलकर अनुभव को खास बनाते हैं। सर्दियों में मांडू की पहचान और भी निखर जाती है।

हल्की धूप चेहरे को सहलाती है, ठंडी हवा किलों की दीवारों से टकराकर बीते दौर की कहानियां सुनाती है और चारों ओर फैली हरियाली सफर को सुकून में बदल देती है। परमार शासकों से लेकर मालवा सल्तनत तक फैला मांडू का इतिहास यहां की हर इमारत में दर्ज है।

दो तालाबों के बीच बना जहाज महल पानी में तैरते जहाज जैसा आभास देता है, तो रानी रूपमती महल से दिखती नर्मदा घाटी प्रेम और त्याग की कथा को जीवंत कर देती है। हिंडोला महल की झुकी दीवारें और जामा मस्जिद की भव्यता मांडू की सांस्कृतिक समृद्धि का एहसास कराती हैं।

  • अवश्य देखें : जहाज महल, रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, बाग गुफाएं।
  • ऐसे पहुंचें : नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर (लगभग 100 किमी)। इंदौर से बस/टैक्सी सुविधाजनक। रेल से रतलाम या इंदौर होकर पहुंचा जा सकता है।
  • ठहरने की व्यवस्थाः मांडू में पर्यटकों के ठहरने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म के मालवा रिजार्ट व मालवा रिट्रीट सहित निजी होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे उपलब्ध हैं। सीजन में अग्रिम बुकिंग जरूरी रहती है।
  • विशेषता: शांत वातावरण लुभाता है। फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त जगह।

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