‘रेरा को बंद कर देना ही बेहतर’, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट?

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फटकार लगाने वाले लहजे में कहा कि समय आ गया है कि सभी प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के गठन पर पुनर्विचार करें क्योंकि यह संस्था डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों की मदद करने के अलावा कुछ नहीं कर रही।

अदालत ने कहा कि रेरा को जिन लोगों के लिए बनाया गया था, वे पूरी तरह से उदास, निराश और हताश हैं। बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, इस अदालत को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने ये टिप्पणियां हिमाचल प्रदेश सरकार को रेरा का कार्यालय अपनी पसंद की जगह पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए कीं। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य लोगों की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें प्रदेश के रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने पहले रेरा कार्यालय को स्थानांतरित करने से जुड़ी जून, 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में 30 दिसंबर, 2025 को जारी आदेश में अंतरिम आदेश जारी रखने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने इस निर्देश पर रोक लगा दी।

वकील सुगंधा आनंद के जरिये सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में हिमाचल प्रदेश ने कहा कि प्रदेश के रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का फैसला शिमला शहर में भीड़ कम करने के लिए लिया गया था और यह पूरी तरह से प्रशासनिक वजहों से लिया गया था।

प्रतिवादी की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि अथॉरिटी के समक्ष आने वाली 90 प्रतिशत परियोजनाएं शिमला, सोलन, परवाणू और सिरमौर में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में हैं। रेरा के समक्ष लंबित लगभग 92 प्रतिशत शिकायतें सिर्फ इन्हीं जिलों से हैं और धर्मशाला में सिर्फ 20 परियोजनाएं हैं।

जब पीठ को बताया गया कि रेरा में एक सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी को नियुक्त किया गया है तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”हर राज्य में यह एक पुनर्वास केंद्र बन गया है। इन सभी प्राधिकरणों पर इन्हीं लोगों का कब्जा है।”

उन्होंने कहा, ”जिन लोगों के लिए इस संस्था का गठन किया गया था, उनमें से किसी को भी कोई असरदार राहत नहीं मिल रही है। यह संस्था असल में अब किसके लिए काम कर रही है, आपको इन लोगों से मिलने पर पता चलेगा।” शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि शिमला पूर्ण रूप से क्षमता से अधिक भर चुका है।

याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा, ”प्रदेश को रेरा का कार्यालय अपनी पसंद की जगह पर स्थानांतरित करने की अनुमति है। लेकिन यह हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा।” हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता ने पीठ को बताया कि एक नीतिगत फैसले के तहत प्रदेश पालमपुर, धर्मशाला और दूसरे शहरों को विकसित कर रहा है।

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