‘बांग्लादेश की तरह भारतीय कपड़ों पर भी अमेरिका में लगेगा जीरो टैरिफ’, पीयूष गोयल का अहम बयान

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भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता के बीच भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि अंतिम व्यापार समझौते में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को भी बांग्लादेश जैसी शून्य टैरिफ की सुविधा मिल सकती है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में जारी अंतरिम व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर चर्चा जारी है। इससे पहले अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, जिससे निर्यातक को राहत मिली थी।

लेकिन, इस बीच खबर आई कि अमेरिका ने बांग्लादेश को विशेष छूट दी है, जिससे वहां से अमेरिकी कपास से बने वस्त्रों के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसी वजह से भारतीय निर्यातकों में चिंता बढ़ गई थी।

क्या है बांग्लादेश को मिली सुविधा?

पीयूष गोयल ने साफ कहा कि जिस तरह बांग्लादेशको यह सुविधा दी गई है कि अगर वह अमेरिका से कच्चा माल खरीदकर कपड़ा तैयार करे और फिर उसे अमेरिका में निर्यात करे तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा, वैसे ही भारत को भी यह सुविधा मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान पिछले सप्ताह जारी अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क में शामिल नहीं है, लेकिन इसे अंतिम समझौते में जोड़ा जा सकता है। गोयल के अनुसार, अभी व्यापार समझौता अंतिम रूप में नहीं है और जब पूरी तरह तैयार हो जाएगा तब इसकी सभी शर्तें स्पष्ट हो जाएंगी।

कांग्रेस के आरोपों पर जवाब

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि यह समझौता डोनल्ड ट्रंप के सामने भारत का आत्मसमर्पण है और इससे बांग्लादेश को भारत से ज्यादा फायदा मिला है।

पीयूष गोयल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद में गलत जानकारी फैलाई गई है। उनका कहना है कि भारत को भी वही सुविधा मिलेगी जो बांग्लादेश को दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अंतिम समझौते में भारत के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

अमेरिका, भारत के कपड़ा निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। भारत से होने वाले कुल वस्त्र परिधान निर्यात का करीब 30% हिस्सा अमेरिका जाता है। हाल ही में टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करना बड़ी राहत थी।

लेकिन अगर बांग्लादेश को शून्य मिलता और भारत 18% टैरिफ बना रहता, तो भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते थे। अब यदि भारत को भी जीरो यूएस टैरिफ की सुविधा मिलती है, तो टेक्सटाइन सेक्टर को बड़ा फायदा होगा और अमेरिका के बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

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